उत्तर प्रदेश

सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में शिक्षकों की भूमिका अहम : कुलपति प्रो. पूनम टंडन

एमएमटीटीसी में जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य पर एसडीजी आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

गोरखपुर : दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) में सोमवार को “जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य” विषय पर सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) आधारित शॉर्ट टर्म प्रोग्राम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने की।

कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि स्वस्थ और समृद्ध समाज के निर्माण के लिए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ जल, स्वच्छ वायु तथा सुरक्षित एवं पौष्टिक भोजन अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को साकार करने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षक ही समाज में जागरूकता और सकारात्मक व्यवहार परिवर्तन के प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा वैश्विक विषय बताते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों से इस दिशा में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने का आह्वान किया। साथ ही प्रतिभागियों से जैविक खेती, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत जीवनशैली अपनाने की अपील की।

एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने स्वागत संबोधन में बताया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अंतर्गत जीरो हंगर, अच्छा स्वास्थ्य एवं कल्याण तथा क्लाइमेट एक्शन जैसे प्रमुख विषयों पर आधारित है। उन्होंने “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सतत विकास के सभी लक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और सामूहिक प्रयासों से ही समावेशी एवं न्यायपूर्ण भविष्य का निर्माण संभव है। उन्होंने भारतीय संस्कृति के “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे मूल मंत्रों का उल्लेख करते हुए प्रकृति संरक्षण के लिए सभी से जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र में वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी ने बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों से बढ़ रही बीमारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए संतुलित एवं पर्यावरण-अनुकूल आहार प्रणाली अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

दूसरे तकनीकी सत्र में आईसीएमआर-राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान, गोरखपुर के वैज्ञानिक-ई डॉ. गौरव राज द्विवेदी ने जलवायु परिवर्तन और जनस्वास्थ्य पर आईसीएमआर के शोध एवं नवीनतम निष्कर्षों की जानकारी दी। वहीं अंतिम तकनीकी सत्र में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. शरद कुमार मिश्रा ने पर्यावरणीय चेतना पर व्याख्यान देते हुए प्रकृति के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए 6R सिद्धांत—रीथिंक, रिफ्यूज़, रिड्यूस, रीयूज़, रिपेयर और रीसायकल—को अपनाने पर जोर दिया।

प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से 70 से अधिक शिक्षक प्रतिभाग कर रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, गोवा और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के शिक्षक शामिल हैं। प्रतिभागियों में वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, पर्यावरण विज्ञान, कृषि विज्ञान, भूविज्ञान, रसायन विज्ञान, जनस्वास्थ्य, विधि, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, हिंदी, अंग्रेजी, वाणिज्य और गृह विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के शिक्षकों की सहभागिता रही.

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