गोड्डा
बच्चों के साथ हो रहे यौन अपराध में गंभीर हो पुलिस : पीडीजे

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। बच्चों के साथ हो रहे यौन अपराध जैसी घटनाओं को रोकने के लिए जिला व्यवहार न्यायालय परिसर में पाक्सो व जेजे एक्ट पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसका उदघाटन पीडीजे रमेश कुमार, फैमिली जज अनिल पांडेय सहित न्यायिक पदाधिकारी, एसडीओ, एसडीपीओ आदि के द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कहा कि इसका दायरा काफी बढ़ा दिया गया है। इसके कई आयाम है। जिसके तहत कई सेक्शन भी जोड़े गए है। जिसकाे लेकर इसके सभी स्टेक होल्डर्स को सीखने व समझने की जरूरत है। जिला फैमिली जज अनिल पांडेय ने पूरे कार्यशाला के आयोजन पर जोर देकर कहा कि पाक्सो एक्ट जेंडर इक्ववलिटी को लेकर बनाया गया। इसमें बच्चे व बच्चियां दोनो के साथ यौन अपराध में दंड का प्रावधान है। बताया कि इस प्रकार के अपराध के नियंत्रण के लिए जरूरी है कि महिला पुलिस बच्चो से पुछताछ करे, लेकिन दुर्भाग्य से जिले में महिला पुलिस की संख्या कम है। इसके अलावा यह भी कहा कि छोटे बच्चे अथवा बच्ची के साथ किसी प्रकार का अपराध होने पर जरूरी है कि उसके माता पिता व अथवा अभिभावक साथ रहे। ताकी बच्चे सेफ महसूस कर सके। बताया कि पुलिस को किसी भी हाल में पीड़ित के समक्ष वर्दी में नही रहना है। बताया कि जो भी इस प्रकार के केस में अनुसंधानक बनते है, उन पर काफी जिम्मेवारी बनती है। हर हाल में समय सीमा के अंदर साक्ष्य कलेक्शन करने की बात कही। यह भी बताया कि डाक्टर का योगदान भी इस प्रकार के केस मे जरूरी है। यदि दोनो टालमटोल करेगें तो पीड़ित को न्याय मिलना मुश्किल है। बताया कि पूरे मामले में पुलिस संजीदगी से बयान ले। हर हाल में फ्रेंडली वातावरण रखें तथा इसका निध्श्चित रूप से ध्यान रखे कि किसी भी हाल में पीड़ित के सम्मान को ठेंस नहीं पहुंचना चाहिए। वहीं, न्यायिक पदाधिकारी मुक्ति भगत ने जे जे एक्ट के बारे में बताया। कहा कि हर हाल में 24 घंटे के अंदर बोर्ड के सामने नाबालिग को उपस्थित करना होता है। साथ ही हर प्रकार के अपराध में बच्चों को परेशान नहीं करता है। गंभीर अपराध की प्रक़ति में ही पुलिस को प्रक्रिया के अधीन चलना है। यदि अपराध की प्रकृति गंभीर नहीं है तो बांड पर छोड़ देना है। साथ ही यह भी बताया कि हर हाल में किसी भी नाबालिग को हथकड़ी हाथ में नहीं लगाना है। वहीं, इस अवसर पर एसडीओ बैद्यनाथ उरांव ने भी अपनी कीमती बातें साझा की। कहा कि सभी स्टेक होल्डर्स पूरे मामले में गंभीर रहे। इस दौरान जिला विधिक प्राधिकार के सचिव दीपक कुमार सहित सभी न्यायिक पदाधिकारी, बार एसोसियेशन के अध्यक्ष सुशील झा, सचिव योगेश चंद्र झा, एलएडीसी, अधिवक्ता, मध्यस्थ आदि उपस्थित थे।



