स्कूलों में अचानक पहुंचीं जिला शिक्षा अधिकारी, कक्षाओं में बैठकर परखी पढ़ाई
अभिभावकों से की बच्चों को नियमित भेजने की अपील

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। जिले में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने सोमवार को विकासखंड देवसर के तीन शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। उनके अचानक पहुंचने से विद्यालयों में हड़कंप की स्थिति रही। निरीक्षण के दौरान उन्होंने शिक्षण व्यवस्था, विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षकों की कार्यप्रणाली और विद्यालयीन व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सबसे पहले जिला शिक्षा अधिकारी शासकीय प्राथमिक विद्यालय नया टोला बरका पहुंचीं। यहां दोनों शिक्षिकाएं उपस्थित मिलीं और कक्षाएं नियमित संचालित होती पाई गईं। विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर उन्होंने प्रधानाध्यापक से जानकारी ली। बताया गया कि धान की रोपाई के कारण कई बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। इस पर उन्होंने स्वयं गांव में घर-घर जाकर अभिभावकों से मुलाकात की और बच्चों को नियमित विद्यालय भेजने की अपील की। अभिभावकों ने भी बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।
इसके बाद शासकीय हाई स्कूल पिपरी में उन्होंने कक्षा 6 और 7 के विद्यार्थियों से गणित और हिंदी विषय के सवाल पूछे तथा ब्लैकबोर्ड पर हल करवाए। विद्यार्थियों के संतोषजनक प्रदर्शन पर उन्होंने शिक्षकों की सराहना की। निरीक्षण के दौरान विद्यालय का ब्लैकबोर्ड अनुपयुक्त मिलने पर प्राचार्य को तत्काल नया ग्रीन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। सभी शिक्षकों की उपस्थिति भी ऑनलाइन ऐप के माध्यम से दर्ज पाई गई।
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बरका में जिला शिक्षा अधिकारी ने कक्षा 9 के विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी शैक्षणिक तैयारी का आकलन किया। अंग्रेजी विषय की कक्षा में विद्यार्थियों से अंग्रेजी में प्रश्न पूछे गए, जिनका अधिकांश विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिया। कुछ विद्यार्थियों ने अंग्रेजी में संवाद कर अपनी दक्षता का भी परिचय दिया। विद्यालय के सभी शिक्षक निरीक्षण के दौरान उपस्थित मिले।
निरीक्षण के समापन पर जिला शिक्षा अधिकारी कविता त्रिपाठी ने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित उपस्थिति और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोड़ना केवल विद्यालय ही नहीं, बल्कि अभिभावकों और समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण से ही विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है।



