झारखंड

‘ऑपरेशन नवजीवन-II’ की बड़ी सफलता, 16 हार्डकोर माओवादी कमांडरों ने हथियारों सहित किया आत्मसमर्पण

Major success for 'Operation Navjeevan-II': 16 hardcore Maoist commanders surrender along with their weapons.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची/लातेहार। झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति तथा सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सघन नक्सल विरोधी अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में “नई दिशा – एक नई पहल” के तहत संचालित “ऑपरेशन नवजीवन-II” के अंतर्गत प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के 16 शीर्ष हार्डकोर एवं इनामी नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 1 रीजनल कमेटी सदस्य (RCM), 3 जोनल कमेटी सदस्य (ZCM), 3 सब-जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), 6 एरिया कमेटी सदस्य (ACM) तथा 3 अन्य कैडर शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से लातेहार, कोल्हान और सारंडा क्षेत्रों में सक्रिय थे तथा कई नक्सली घटनाओं में संलिप्त रहने के कारण आतंक का पर्याय माने जाते थे। आत्मसमर्पण के दौरान इन नक्सलियों ने सुरक्षा बलों के समक्ष 11 अत्याधुनिक हथियार, 38 मैगजीन तथा 1,562 कारतूस भी जमा कराए। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह आत्मसमर्पण नक्सल संगठन के लिए एक बड़ा झटका है और इससे प्रभावित क्षेत्रों में शांति एवं विकास की प्रक्रिया को और मजबूती मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन, पुनर्वास तथा रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। इसके साथ ही सुरक्षा बलों के लगातार चल रहे अभियान और जनविश्वास बढ़ाने के प्रयासों ने भी नक्सलियों को हिंसा का मार्ग छोड़ने के लिए प्रेरित किया है। सुरक्षा बलों ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी पूर्व नक्सलियों का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार की मंशा उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर सामान्य एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है। अधिकारियों ने अन्य भटके हुए युवाओं और नक्सल संगठन से जुड़े लोगों से भी हिंसा का मार्ग त्यागकर सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने और विकास की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि “ऑपरेशन नवजीवन-II” की यह सफलता झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो राज्य में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है।

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