बागपत

मोहम्मद रफ़ी को अपना आदर्श मानते हैं सिंगर पवन बालियान

रफ़ी साहब के गीतों की तर्ज पर भजन गाकर जागरण और धार्मिक आयोजनों में जीत रहे श्रोताओं का दिल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत। संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं, जो समय गुजरने के साथ और भी यादगार बनती जाती हैं। महान पार्श्व गायक मोहम्मद रफ़ी ऐसी ही अमर आवाज के धनी थे। उनके गीतों की मिठास, गायकी की सादगी और आवाज की भावनात्मक गहराई आज भी संगीत प्रेमियों को प्रभावित करती है। इसी महान गायक को अपना आदर्श मानते हैं क्षेत्र के प्रतिभाशाली सिंगर पवन बालियान।
पवन बालियान की गायकी की खासियत यह है कि वे मोहम्मद रफ़ी साहब की गायकी से प्रेरणा लेकर उनके लोकप्रिय गीतों की धुनों की तर्ज पर भजनों को तैयार करते हैं और उन्हें जागरण, धार्मिक कार्यक्रमों तथा अन्य आध्यात्मिक आयोजनों में अपनी आवाज देते हैं। जब पवन मंच से भजन प्रस्तुत करते हैं तो श्रोताओं को भक्ति के साथ-साथ पुराने फिल्मी संगीत की मधुरता का भी अहसास होता है।
रफ़ी साहब की गायकी से मिली प्रेरणा
पवन बालियान का कहना है कि मोहम्मद रफ़ी उनके लिए केवल एक महान गायक नहीं, बल्कि गायकी की पाठशाला हैं। रफ़ी साहब ने जिस सहजता से रोमांटिक गीतों से लेकर देशभक्ति, दर्द, सूफियाना अंदाज और भक्ति भाव से जुड़े गीतों को अपनी आवाज दी, वह उन्हें सबसे अधिक प्रभावित करता है।
इसी प्रेरणा को पवन बालियान ने अपनी गायकी में अपनाया है। वे रफ़ी साहब की लोकप्रिय धुनों की तर्ज पर भजनों के बोल तैयार कर उन्हें धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हैं। इससे भजन सुनने वाले श्रोताओं को एक अलग तरह का संगीत अनुभव मिलता है।
भक्ति संगीत में फिल्मी धुनों का अनूठा प्रयोग
पवन बालियान की प्रस्तुतियों में सबसे खास बात उनका भक्ति और लोकप्रिय संगीत का मेल है। परिचित धुन सुनते ही श्रोताओं का ध्यान मंच की ओर आकर्षित होता है और जब उसी तर्ज पर भगवान की स्तुति, माता के भजन या धार्मिक संदेश प्रस्तुत किए जाते हैं तो माहौल भक्तिमय हो उठता है।
जागरण और धार्मिक कार्यक्रमों में उनकी प्रस्तुतियों के दौरान श्रोता उनके साथ भजनों को गुनगुनाते नजर आते हैं। कई बार उनकी प्रस्तुति के दौरान पूरा माहौल तालियों और जयकारों से गूंज उठता है।
मंच पर आवाज के साथ भाव भी जरूरी
पवन बालियान मानते हैं कि केवल सुर में गाना ही पर्याप्त नहीं है। खासकर भजन गायन में शब्दों के भाव को समझना और उसे आवाज के माध्यम से श्रोताओं तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि वे भजनों को केवल गाने के बजाय उनमें भाव और आध्यात्मिक अनुभूति पैदा करने का प्रयास करते हैं।
उनकी कोशिश रहती है कि भजन सुनने वाला व्यक्ति केवल संगीत न सुने, बल्कि उसके शब्दों और भावों से भी जुड़ सके।
रफ़ी साहब की पुण्यतिथि पर विशेष स्मरण
31 जुलाई को मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि के अवसर पर पवन बालियान जैसे कलाकारों द्वारा उन्हें याद करना इस बात का प्रमाण है कि महान कलाकारों की आवाज और उनकी कला पीढ़ियों तक प्रेरणा देती रहती है। रफ़ी साहब भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी गायकी आज भी नए कलाकारों के लिए मार्गदर्शन का काम कर रही है।
पवन बालियान का रफ़ी साहब को आदर्श मानना और उनकी लोकप्रिय धुनों पर भक्ति गीत प्रस्तुत करना संगीत की पुरानी विरासत को नए धार्मिक स्वरूप में श्रोताओं तक पहुंचाने की एक सुंदर कोशिश कही जा सकती है।
रफ़ी साहब के सुरों से प्रेरणा, भक्ति के रंग में पवन की आवाज
पवन बालियान की गायकी की यह यात्रा बताती है कि संगीत की कोई सीमा नहीं होती। एक महान फिल्मी गायक की धुनें जब भक्ति के शब्दों के साथ मिलती हैं तो वह श्रोताओं के लिए एक नया अनुभव बन जाती हैं। यही प्रयोग पवन बालियान को धार्मिक आयोजनों में अपनी अलग पहचान बनाने में मदद कर रहा है।
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