बेतुल
बैतूल विश्व आदिवासी दिवस पर पड़ापेन पूजा के बाद शहर में निकली रैली
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ प्रतिभावान विद्यार्थियों का किया सम्मान

आदिवासी संस्कृति, परंपरा और भाषा बचाने का लिया संकल्प
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। समस्त आदिवासी समाज संगठनों के तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह जिला अस्पताल में मरीजों को फल वितरण से हुई। इसके बाद पड़ापेन ठाना सदर में पड़ापेन की पूजा कर सांस्कृतिक रैली निकाली गई। ढोल-शहनाई के साथ निकली रैली अम्बेडकर चौक, रानी दुर्गावती चौक, शिवाजी चौक, लल्ली चौक, बस स्टैंड होते हुए कोठी बाजार स्थित सामुदायिक मंगल भवन पहुंची, जहां मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
रैली के दौरान शहर में स्थापित डॉ. भीमराव आंबेडकर, रानी दुर्गावती, छत्रपति शिवाजी महाराज, सरदार विष्णु सिंह गोंड, राजा भोज, महाराणा प्रताप और दुर्गादास राठौर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। रैली में रानी दुर्गावती और बिरसा मुंडा की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। डंडार टीम ने सामूहिक प्रस्तुति देकर रैली की शोभा बढ़ाई।
सामुदायिक मंगल भवन में आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं और आदिवासी सांस्कृतिक ज्ञान परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों का सम्मान किया गया। सभी अतिथियों का पीला गमछा पहनाकर और हल्दी-चावल का टीका लगाकर स्वागत किया गया। बसंत कवड़े ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष हंसराज धुर्वे ने आदिवासी समाज में सिकल सेल बीमारी के प्रति जागरूकता की आवश्यकता बताई। जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा ने आदिवासी समाज को मूलनिवासी और मेहनतकश समाज बताते हुए कहा कि समाज की पहचान और अधिकारों के संरक्षण के लिए एकजुटता जरूरी है। कुनबी समाज के पूर्व अध्यक्ष दिनेश मस्की ने आदिवासी समाज को प्रकृति पूजक बताते हुए संस्कृति, सभ्यता और भाषा को बचाने का आह्वान किया।
डॉ. अंकिता सीते ने सिकल सेल एनीमिया की विस्तृत जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर सिकल सेल परीक्षण भी किया। सरवन सिंह मरकाम ने रीति-रिवाज और परंपराओं को बचाने तथा जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कारों के महत्व पर जानकारी दी। दिलीप धुर्वे ने पेसा कानून और ग्रामसभा की भूमिका समझाई। देवेश्वरी मरकाम ने विश्व आदिवासी दिवस की इस वर्ष की थीम ‘दाइयों का सम्मान’ सहित उसके महत्व की जानकारी दी।
कार्यक्रम में कल्लू सिंह उइके, अंतू सिंह मर्सकोले, जनकलाल मवासे, सरवन सिंह मरकाम, सोहनलाल धुर्वे, सुनील सलामे, विनोद धुर्वे, बसंत कवड़े, नंदकिशोर धुर्वे, अखिलेश कवड़े, सुरेश सलामे, हुकुमचंद इवने, शंकर सिंह आहके, दुर्गा उइके, मन्नूलाल धुर्वे, दिलीप धुर्वे, संजय धुर्वे, योगेश धुर्वे, भूपेंद्र पंद्रम, सतेंद्र उइके, बारेलाल सिरसाम और मोटू सिंह सहित राजस्व, शिक्षा, इंजीनियरिंग, पुलिस, कृषि और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा सामाजिक बंधु मौजूद रहे।




