मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम में 45-वर्षीय महिला के रेयर एक्टोपिक किडनी से गोल्फ बॉल के आकार की पथरी सफलतापूर्वक निकाली गई

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गुरुग्राम : एक रेयर और कॉम्प्लेक्स यूरोलॉजिकल प्रक्रिया में मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम के डॉक्टरों ने 45-वर्षीय महिला की जन्मजात रूप से पेल्विस में स्थित एक्टोपिक किडनी से 4.3 सेंटीमीटर की स्टैगहॉर्न किडनी स्टोन सफलतापूर्वक निकाली। यह पथरी लगभग गोल्फ बॉल के आकार की थी। डॉक्टरों ने एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की मदद से बिना किडनी को नुकसान पहुंचाए पूरी पथरी निकालने में सफलता हासिल की। मिनिमली इनवेसिव प्रक्रिया के बाद मरीज को बार-बार होने वाले यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और लंबे समय से हो रही पेशाब संबंधी परेशानी से राहत मिली।
गुड़गांव निवासी, सोनू शर्मा को करीब दो महीने से कमजोरी, बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और पेशाब करते समय जलन की समस्या हो रही थी। समय के साथ उनकी परेशानी बढ़ने लगी, जिसके बाद परिवार उन्हें इलाज के लिए मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम लेकर आया।
विस्तृत जांच के बाद मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम के यूरोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड – डॉ. चंद्रकांत कर के नेतृत्व में मल्टीडिसिप्लिनरी यूरोलॉजी टीम ने पाया कि मरीज की बाईं किडनी अपनी सामान्य स्थिति में न होकर पेल्विस में स्थित थी और असामान्य रूप से घूमी हुई थी। एक्टोपिक किडनी एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जो लगभग 2,000 में से एक व्यक्ति में देखी जाती है। अधिकांश लोगों में इसके कोई लक्षण नहीं होते और उन्हें इस स्थिति की जानकारी भी नहीं होती। हालांकि, किडनी की असामान्य स्थिति के कारण कुछ मरीजों में किडनी स्टोन, पेशाब के रास्ते में रुकावट और बार-बार इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिनका समय पर इलाज न होने पर किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
जांच में किडनी के अंदर 4.3 सेंटीमीटर की स्टैगहॉर्न स्टोन पाई गई, जिसके कारण किडनी में मध्यम स्तर की सूजन यानी हाइड्रोनेफ्रोसिस हो गई थी। किडनी की असामान्य स्थिति और पथरी के बड़े आकार व कॉम्प्लेक्स संरचना के कारण सामान्य एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से इसका इलाज करना चुनौतीपूर्ण था।
मामले की कॉम्प्लीकेशन को देखते हुए डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से बड़ी पथरी को निकालने का निर्णय लिया। साथ ही, रिकवरी के दौरान किडनी से पेशाब का सही तरीके से प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए एक अस्थायी ट्यूब, जिसे DJ स्टेंट कहा जाता है, भी लगाया गया।
मैक्स हॉस्पिटल, गुरुग्राम के यूरोलॉजी, किडनी ट्रांसप्लांट एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर एवं यूनिट हेड – डॉ. चंद्रकांत कर ने कहा, “एक्टोपिक किडनी एक जन्मजात स्थिति है, जिसमें किडनी सामान्य स्थान पर विकसित होने के बजाय किसी असामान्य जगह, आमतौर पर पेल्विस में विकसित होती है। किडनी की बदली हुई संरचना पेशाब के सामान्य प्रवाह को प्रभावित कर सकती है और किडनी स्टोन तथा बार-बार होने वाले इंफेक्शन का खतरा बढ़ा सकती है। इस मामले में मरीज की किडनी में एक बड़ी स्टैगहॉर्न स्टोन थी। यह एक शाखाओं जैसी संरचना वाली पथरी होती है, जो किडनी के यूरिन कलेक्टिंग सिस्टम के बड़े हिस्से में फैल सकती है। असामान्य एनाटॉमी के कारण ऐसे मामलों का इलाज चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सावधानीपूर्वक प्लानिंग और एडवांस्ड मिनिमली इनवेसिव तकनीक की मदद से हम पथरी को सुरक्षित रूप से निकालने और किडनी की कार्यक्षमता को संरक्षित करने में सफल रहे।”
डॉ. कर ने आगे कहा, “स्टैगहॉर्न स्टोन का समय पर इलाज बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका इलाज न होने पर बार-बार इंफेक्शन और धीरे-धीरे किडनी डैमेज होने का खतरा रहता है। जिन लोगों को बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, पेशाब में जलन, पेशाब में खून, लगातार पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द या असामान्य कमजोरी महसूस होती है, उन्हें समय पर डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान और इलाज से गंभीर कॉम्प्लीकेशन्स को रोकने और किडनी की कार्यक्षमता को बनाए रखने में मदद मिल सकती है, खासकर उन मरीजों में जिनमें जन्मजात रूप से किडनी की संरचना सामान्य नहीं है।”
सर्जरी बिना किसी कॉम्प्लीकेशन के सफलतापूर्वक पूरी हुई और मरीज की रिकवरी अच्छी रही। उन्हें तीन दिन बाद स्थिर स्थिति में हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। उन्हें नियमित फॉलो-अप की सलाह दी गई है और लगभग एक महीने बाद अस्थायी यूरिनरी स्टेंट को निकालने की योजना है।
यह सफल उपचार मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम की एडवांस्ड, पेशेंट-सेंट्रिक यूरोलॉजिकल केयर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हॉस्पिटल में अत्याधुनिक मिनिमली इनवेसिव तकनीकों और मल्टीडिसिप्लिनरी विशेषज्ञता के माध्यम से कॉम्प्लेक्स यूरोलॉजिकल मामलों का प्रभावी उपचार किया जा रहा है।



