बेतुल
बैतूल मुलताई के निर्माणाधीन सांदीपनि स्कूल में भ्रष्टाचार की शिकायत, जांच कराने की मांग
मुख्य सचिव, मुख्य तकनीकी परीक्षक और बैतूल कलेक्टर से शिकायत

कलेक्टर ने दिए एक सप्ताह में जांच प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। मुलताई में करीब 42 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहा मुलताई का सीएम राइज (सांदीपनि) स्कूल भवन निर्माण पूरा होने से पहले ही गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। जन आंदोलन मंच के अनिल सोनी ने भवन निर्माण में तकनीकी खामियों, घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल और कथित भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव, मुख्य तकनीकी परीक्षक और बैतूल कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत में निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों पर कार्रवाई और जांच पूरी होने तक संबंधित ठेकेदार के भुगतान पर रोक लगाने की मांग की भी गई है। शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने अब पीडब्ल्यूडी और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्रियों को संयुक्त जांच के निर्देश दिए हैं। साथ ही एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा है।
शिकायत में भवन की ड्राइंग और डिजाइन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ईपीसीओ विभाग द्वारा नियुक्त आर्किटेक्ट की ओर से तैयार डिजाइन में कई तकनीकी खामियां हैं, जिनका भविष्य में भवन की मजबूती और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि स्कूल शिक्षा विभाग ने किसी विशेषज्ञ रिपोर्ट के बिना कार्यालय में बैठे आर्किटेक्ट से मिलीभगत कर ‘गुड फॉर कंस्ट्रक्शन’ की अनुमति जारी की। इसी आधार पर पूरे डिजाइन और निर्माण प्रक्रिया की स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग की गई है।
शिकायत में कहा गया है कि बड़े आकार के स्लैब के बावजूद डाउन बीम की डिजाइन में खामी है और फ्लैट स्लैब में पंचिंग शेयर की जांच नहीं की गई। स्लैब की मोटाई तथा उसमें प्रयुक्त सीमेंट और लोहे की मात्रा भी वास्तविक स्ट्रक्चरल ड्राइंग के अनुरूप नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, नई डाली गई छतों में अभी से झुकाव दिखाई दे रहा है। इससे भविष्य में भवन की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका जताई गई है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर द्वारा मुख्य सुदृढीकरण और कॉलम बार की निरंतरता को प्रमाणित नहीं किए जाने पर भी शिकायत में सवाल उठाए गए हैं।
भवन की उपयोगिता और सुविधाओं को लेकर भी कई आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। शिकायत के अनुसार, ग्राउंड फ्लोर के पांच कमरों और ऑडिटोरियम में प्राकृतिक रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे दिन में भी कक्षाओं को बिजली पर निर्भर रहना पड़ेगा। वहीं आवश्यकता से अधिक कांच के इस्तेमाल से कमरों में हवा के उचित वेंटिलेशन पर असर पड़ने की बात कही गई है। जल निकासी के लिए पर्याप्त ढलान नहीं होने से बरामदों और रैंप की छतों पर बारिश का पानी जमा होने का आरोप है। शिकायतकर्ता ने इससे भविष्य में सीपेज और लीकेज की समस्या उत्पन्न होने की आशंका जताई है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी शिकायतकर्ता के आरोप है कि रेत के स्थान पर बड़ी मात्रा में डस्ट का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण पहले चरण में बनी दीवारों, बीम और कॉलम में अभी से बड़ी दरारें दिखाई देने लगी हैं। भवन में लगाए गए दरवाजे और सिटकनी, बरामदे की टाइल्स तथा सीढ़ियों की रेलिंग के उखड़ने और टूटने का दावा भी किया गया है। शिकायतकर्ता ने इन खामियों को निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाला संकेत बताते हुए पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच की मांग की है।
शिकायत पर कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्रियों को संयुक्त रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्हें निर्माण कार्य में बरती गई कथित अनियमितताओं, तकनीकी खामियों और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की विस्तृत जांच कर एक सप्ताह के भीतर जांच प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। इस संबंध में संबंधित विभागों को औपचारिक पत्र जारी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
जन आंदोलन मंच ने लोक निर्माण विभाग पीआईयू बैतूल के जिम्मेदार अधिकारियों और आर्किटेक्ट कंसल्टेंसी की भूमिका की भी जांच कर कार्रवाई की मांग की है। मंच के अनिल सोनी ने कहा कि बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़े भवन के निर्माण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अब कलेक्टर के निर्देश के बाद संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट पर पूरे मामले की अगली कार्रवाई निर्भर करेगी। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदार या संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बन सकती है।



