शामली
तत्कालीन राजस्व अधिकारियों पर नहीं गिरी प्रशासन की गाज

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
चौसाना। करीब 25 वर्षों से चले आ रहे 48 बीघा भूमि विवाद में बोर्ड ऑफ रेवेन्यू द्वारा वादी पक्ष के हक में फैसला दिए जाने के बाद प्रशासन ने खड़ी धान की फसल की पैराई कराकर उसे ग्राम सभा की सुपुर्दगी में दे दिया, लेकिन भूमि को लेकर पूर्व में हुए राजस्व रिकॉर्ड के विवादित बदलाव के लिए जिम्मेदार तत्कालीन अधिकारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
मामला वर्ष 2001 से मक्खन सिंह व अन्य तथा गुरमेज सिंह पक्ष के बीच चल रहा था। वादी पक्ष का आरोप था कि तत्कालीन तहसील प्रशासन की मिलीभगत से भूमि प्रतिवादी के नाम दर्ज की गई थी। बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ने एक जून को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वादी पक्ष के स्वामित्व को सही माना और राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करने के निर्देश दिए। अब प्रशासन ने फसल तो कुर्क कर ली, लेकिन रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी करने वाले तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि गलती हुई थी तो कार्रवाई केवल वर्तमान विवाद तक सीमित क्यों है और जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच या विभागीय कार्रवाई कब होगी? चर्चा है कि मामले मे तत्कालीन राजस्व लेखपालो सहित जिम्मेदार अधिकारी मामले मे मलाई चाट गए। जिस पर कार्यवाही नही की गई।

