
जिम्मेदारों के दावों की खुली पोल—ठप लाइटें, झाड़ियों में छिपे सांप, जर्जर टीनशेड और गंदे शौचालय; चोरी के बाद भी व्यवस्था जस की तस
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। शहर की सब्जी मंडी में व्यवस्था के नाम पर क्या बचा है? सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं, सफाई व्यवस्था दम तोड़ रही है, प्रकाश व्यवस्था ठप है और मंडी परिसर में जगह-जगह घास-फूस उग आई है। हालत यह है कि झाड़ियों और घास में जहरीले सांप निकलने का खतरा बना हुआ है। यानी यहां कारोबार करने वाले आढ़ती और किसान सड़क, सफाई, सुरक्षा और सुविधाओं—हर मोर्चे पर परेशानी झेलने को मजबूर हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंडी की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की नजर इस बदहाली पर क्यों नहीं पड़ रही? क्या किसी बड़े हादसे या गंभीर घटना का इंतजार किया जा रहा है? गड्ढों में तब्दील सड़कें, रोजाना जूझ रहे आढ़ती और किसान मंडी परिसर की सड़कें लंबे समय से बदहाल बताई जा रही हैं। जगह-जगह बने गड्ढों के कारण किसानों, आढ़तियों और सामान लेकर आने-जाने वाले वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दौरान स्थिति और खराब हो जाती है। मंडी जैसी महत्वपूर्ण जगह पर जहां रोजाना बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी पहुंचते हैं, वहां जर्जर सड़कों का होना व्यवस्था पर सीधा सवाल है।मंडी की प्रकाश व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। मंडी।में लाइट है ही नहीं, कई बार विद्युत विभाग को शिकायत की,लेकिन कार्रवाई सिफ़र हो रही। रात होते ही मंडी परिसर अंधेरे में डूब जाता हैं।यही अंधेरा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ाता है। जब मंडी में लाखों रुपये का माल मौजूद रहता है तो पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था क्यों नहीं? चौकीदार तैनात होने के बावजूद अंधेरे में निगरानी कितनी प्रभावी है, यह सवाल चोरी की घटनाओं के बाद और गंभीर हो गया है। हाल में सलीम के फड़ पर चोरी की घटना सामने आई। आढ़तियों का कहना है कि इससे पहले भी मंडी में लाखों रुपये की चोरी हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में अपेक्षित सुधार न होने को लेकर व्यापारी सवाल उठा रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात में दो चौकीदार तैनात रहते हैं। ऐसे में सवाल है कि अगर चौकीदार हैं तो चोर कैसे पहुंच रहे हैं और अगर निगरानी है तो मंडी के हिस्से अंधेरे में क्यों हैं
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घास-फूस के बीच जहरीले सांप, दहशत में आढ़ती
मंडी परिसर में जगह-जगह घास और झाड़ियां उग आई हैं। आढ़तियों के मुताबिक इन स्थानों से जहरीले सांप निकलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में सवाल केवल सफाई का नहीं, बल्कि आढ़तियों, मजदूरों और किसानों की सुरक्षा का भी है। मंडी में रोजाना काम करने वाले लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और झाड़ियों की कटाई नहीं कराई गई तो किसी दिन गंभीर घटना हो सकती है। आढ़तियों को नया टीनशेड उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं होने की शिकायत है। पुराना टीनशेड जर्जर हालत में है और बारिश में पानी टपकता है। यही कारण है कि आढ़ती वहां बैठने से बचते हैं।आश्वासन के बाद काम कब शुरू होगा? या फिर यह भी फाइलों में दर्ज एक और वादा बनकर रह जाएगा?
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सरकारी नल बंद, शौचालय गंदगी से बेहाल
मंडी में सरकारी नल के खराब होने की शिकायत है। पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए भी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। शौचालयों की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। सफाई के अभाव में वहां गंदगी जमा है।यानी जिस मंडी में किसान और व्यापारी घंटों कारोबार करते हैं, वहां पीने का पानी और साफ शौचालय तक मुहैया नहीं हो पा रहे।
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दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क
मंडी की तस्वीर अगर सड़क से लेकर सुरक्षा और सफाई तक बदहाल है तो फिर व्यवस्था दुरुस्त होने के दावे किस आधार पर किए जा रहे हैं? आढ़तियों का आरोप है कि समस्याओं की जानकारी जिम्मेदारों तक पहुंचने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हो रहा।अब आढ़ती और व्यापारी मांग कर रहे हैं कि मंडी का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए और सड़क, प्रकाश, सफाई, पेयजल, शौचालय,टीनशेड और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति की जांच कराकर समयबद्ध तरीके से सुधार कराया जाए।
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एक तरफ चोरी का डर, दूसरी तरफ सांपों का खतरा—आढ़ती आखिर जाएं तो जाएं कहां?
सब्जी मंडी में हालात ऐसे हैं कि रात में चोरी का डर है और दिन में जहरीले सांपों का खतरा। बारिश में जर्जर टीनशेड परेशानी बढ़ाता है तो रोजाना गड्ढों वाली सड़कें किसानों और व्यापारियों की मुश्किल बढ़ा रही हैं। बंद नल और गंदे शौचालय अलग समस्या हैं।सवाल अब सिर्फ बदहाल मंडी का नहीं, जिम्मेदारी तय करने का है। आखिर इन अव्यवस्थाओं की जवाबदेही किसकी है और कार्रवाई कब होगी?


