पाकुड़

भूमि प्रतिवेदन के अभाव में मनीरामपुर में ईएसआर निर्माण लंबित, शुद्ध पेयजल योजना पर उठे सवाल

ESR construction in Manirampur stalled due to lack of land report; questions raised over the clean drinking water scheme.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।

पाकुड़। आम नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकार की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में उच्चस्तरीय जलमीनार (ईएसआर) एवं अन्य पेयजल संरचनाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इसी क्रम में पाकुड़ प्रखण्ड अन्तर्गत पंचायत मनीरामपुर, संग्रामपुर व झिकरहाटी पश्चिमी सहित अन्य क्षेत्रों में भी शुद्ध पेयजल की सुविधा के लिए ईएसआर निर्माण की योजना प्रस्तावित है। हालांकि, भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण मनीरामपुर पंचायत में करीब डेढ़ वर्षों से ईएसआर निर्माण की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, पाकुड़ की ओर से ईएसआर निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ को पत्र भेजा गया था। पत्र में मौजा मनीरामपुर के विभिन्न दाग नंबरों का उल्लेख करते हुए आवश्यक रकबा की भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। इसके बाद भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ की ओर से सम्बन्धित अंचल कार्यालय को भूमि का सत्यापन, स्थलीय निरीक्षण एवं जांच कर भूमि प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। लेकिन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार, अब तक अंचल कार्यालय, पाकुड़ की ओर से अपेक्षित भूमि प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं कराया गया है। इसके कारण ईएसआर निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई प्रभावित हो रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि जब सरकार ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए योजनाएं संचालित कर रही है, तो भूमि प्रतिवेदन उपलब्ध नहीं होने के कारण महत्वपूर्ण पेयजल संरचना का निर्माण लंबे समय से लंबित क्यों है? करीब डेढ़ वर्षों से निर्माण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से स्थानीय लोगों को योजना के लाभ के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है। मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है कि भूमि प्रतिवेदन उपलब्ध कराने में देरी प्रशासनिक स्तर पर है अथवा भूमि से सम्बन्धित किसी अन्य तकनीकी, कानूनी या स्थानीय समस्या के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है। साथ ही, स्थानीय जनप्रतिनिधियों का अपेक्षित सहयोग मिल रहा है या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़ी योजना को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। बताया जा रहा है कि परियोजना पूर्व उपायुक्त मनीष कुमार के कार्यकाल से लंबित है। तत्कालीन पाकुड़ अंचल अधिकारी भागीरथ महतो ने भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रयास किए थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद नए अधिकारी की पदस्थापना हुई। अब वर्तमान अंचल अधिकारी की जांच और भूमि प्रतिवेदन के बाद निर्माण कार्य का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। वर्तमान  उपायुक्त को मामले का संज्ञान लेते हुए सम्बन्धित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर भूमि संबंधी प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कराने की पहल करनी चाहिए, ताकि मनीरामपुर पंचायत में प्रस्तावित ईएसआर का निर्माण जल्द शुरू हो सके। यदि भूमि प्रतिवेदन में किसी स्तर पर तकनीकी अथवा प्रशासनिक अड़चन है, तो उसे दूर कर समयबद्ध तरीके से आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे ईएसआर निर्माण का रास्ता साफ होगा और सरकार के शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य के अनुरूप स्थानीय ग्रामीणों को पेयजल की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि भूमि प्रतिवेदन अब तक उपलब्ध क्यों नहीं कराया गया और ईएसआर निर्माण की प्रक्रिया में हो रही देरी के लिए जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी? प्रशासनिक स्तर से इस संबंध में स्पष्ट स्थिति सामने आने का इंतजार है।

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Nurul Islam

PRABHARI (MANDAL)

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