जामताड़ा
बाल विवाह रोकने एवं बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करमाटांड़ प्रखंड में नुक्कड़ नाटक का आयोजन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जामताड़ा : आईसीआरडब्ल्यू तथा जामताड़ा जिला प्रशासन के समन्वय से सोमवार को करमाटांड़–विद्यासागर प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत चार टीमों ने अलग-अलग विद्यालयों में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं ग्रामीणों को बाल विवाह की रोकथाम, बालिकाओं की शिक्षा तथा लैंगिक समानता के प्रति जागरूक किया।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “बाल विवाह रोकें, बेटियों को पढ़ाएं” तथा “शिक्षा, समानता और भागीदारी—हम सबकी जिम्मेदारी” का संदेश दिया गया। कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय, संवाद एवं गीतों के माध्यम से बाल विवाह के दुष्परिणामों, बालिकाओं की शिक्षा के महत्व तथा समाज में समानता एवं सहभागिता की आवश्यकता को प्रस्तुत किया। साथ ही “बेटी को पढ़ाएं, आगे बढ़ाएं और उसे अपने सपनों को पूरा करने का अवसर दें” का संदेश भी दिया गया।
टीम-1 ने उत्क्रमित उच्च विद्यालय काला झरिया, झारखंड आवासीय विद्यालय करमाटांड़ एवं उत्क्रमित उच्च विद्यालय सिकरपोशनी में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर लोगों को जागरूक किया। वहीं टीम-2 ने उत्क्रमित मध्य विद्यालय कासीटांड़, पीएम श्री उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिंडारी एवं मध्य विद्यालय झुमकादेवी, करमाटांड़ में अभियान के तहत प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में टीम-3 द्वारा उत्क्रमित उच्च विद्यालय पट्टाजोरी, उत्क्रमित उच्च विद्यालय बेसिक रामपुर एवं राजकीयकृत गुलाब राय गुटगुटिया प्लस टू विद्यालय करमाटांड़ में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता का संदेश दिया गया। वहीं टीम-4 ने उत्क्रमित उच्च विद्यालय कदरुडीह, उत्क्रमित मध्य विद्यालय जगन्नाथपुर एवं उत्क्रमित मध्य विद्यालय पिपरासोल में नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।
नाटक के दौरान कलाकारों ने बाल विवाह से होने वाले सामाजिक, शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संबंधी नुकसान को रोचक तरीके से प्रस्तुत करते हुए बालिकाओं को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने की अपील की। प्रस्तुति में लैंगिक असमानता के कारण बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया। कलाकारों ने संदेश दिया कि बेटियों और बेटों को समान शिक्षा, अवसर और सम्मान मिलना चाहिए तथा किसी भी प्रकार का भेदभाव उनके विकास में बाधक नहीं बनना चाहिए।
विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना की। नुक्कड़ नाटक के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि बाल विवाह रोकें, बेटी को पढ़ाएं, लैंगिक भेदभाव मिटाएं और समान अवसर देकर समाज को आगे बढ़ाएं।
कार्यक्रम के माध्यम से यह भी बताया गया कि बाल विवाह की रोकथाम, बालिकाओं की शिक्षा, लैंगिक समानता और बच्चों के अधिकारों की रक्षा केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बालिकाओं को शिक्षा का अवसर देकर, उनके प्रति भेदभाव समाप्त कर और उन्हें निर्णय लेने तथा समाज में समान रूप से भागीदारी का अवसर देकर ही उन्हें आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाया जा सकता है।




