मथुरा
राधाकुंड के कुसुम सरोवर में मछलियां तड़प-तड़पकर मर रहीं, जिम्मेदार कौन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। राधाकुंड के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले कुसुम सरोवर में जलचरों के असमय मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हर साल की तरह इस बार भी पिछले एक सप्ताह से सरोवर के पानी में बड़ी संख्या में मछलियां मरकर ऊपर तैर रही है। शासन द्वारा सरोवर के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके है। लेकिन यहां रहने वाले जलचरों की सुरक्षा को लेकर मत्स्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह बेखबर बने हुए है। देश-विदेश से कुसुम सरोवर के अलौकिक सौंदर्य और शांति का अनुभव करने आने वाले पर्यटक व श्रद्धालु जल में तैरती मृत मछलियों और उठती दुर्गंध को देखकर बेहद व्यथित है। श्रद्धालुओं का कहना है। कि पवित्र स्थल पर जलचरों की इस तरह की दुर्दशा धार्मिक आस्था पर भी गहरा आघात है। जब इस संबंध में जिम्मेदार प्रशासनिक या मत्स्य विभाग के अधिकारियों से सवाल किया जाता है। तो वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक ही रटा-रटाया जवाब देते है। कुसुम सरोवर की देखरेख का पूरा जिम्मा जीएलए यूनिवर्सिटी का है। प्रशासनिक अनदेखी और जीएलए यूनिवर्सिटी की सुस्ती के बीच कुसुम सरोवर के जलचरों पर संकट मंडरा रहा है। स्थानीय निवासियों सीताराम बाबा, रामदास बाबा, ईश्वर दास, राम भरोसी दास, गोलू शर्मा, देवानंद दास, उदय बाबा, माधव पंडित, महावीर शर्मा, गणेश बघेल ने मत्स्य विभाग और जल विशेषज्ञों की टीम तुरंत सरोवर के पानी की जांच करे और मछलियों को बचाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएं।



