गोड्डा
मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने पर जोर
सितंबर 2026 में जिले में संस्थागत प्रसव उपलब्धि 97 प्रतिशत, अगस्त की तुलना में 3 प्रतिशत की वृद्धि

संस्थागत प्रसव की शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने के लिए प्रखंडवार लक्ष्य एवं उपलब्धि की समीक्षा
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। सिविल सर्जन कार्यालय में जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त लोकेश मिश्रा की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग से संबंधित समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, विशेषकर संस्थागत प्रसव की प्रगति की प्रखंडवार समीक्षा की गई। बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के माध्यम से संस्थागत प्रसव के निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध उपलब्धि की स्थिति से उपायुक्त को अवगत कराया गया। समीक्षा के दौरान प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 तक गोड्डा जिले में संस्थागत प्रसव की उपलब्धि 92 प्रतिशत रही। वहीं, अगस्त 2026 में 94 प्रतिशत तथा सितंबर 2026 में 97 प्रतिशत संस्थागत प्रसव की उपलब्धि दर्ज की गई। सितंबर माह में जिले की उपलब्धि लक्ष्य के विरुद्ध 97 प्रतिशत तक पहुंचना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। बैठक में प्रखंडवार उपलब्धियों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सितंबर 2026 में बोआरीजोर में 77 प्रतिशत, गोड्डा सदर प्लस डीएच में 101 प्रतिशत, महागामा में 104 प्रतिशत, मेहरमा में 111 प्रतिशत, पथरगामा में 69 प्रतिशत, पोड़ैयाहाट में 67 प्रतिशत, सुंदरपहाड़ी में 62 प्रतिशत तथा ठाकुरगंगटी में 106 प्रतिशत संस्थागत प्रसव की उपलब्धि दर्ज की गई। डीसी लोकेश मिश्रा ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी संबंधित पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को संस्थागत प्रसव की उपलब्धि को और बेहतर करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य परामर्श, जांच एवं सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी एवं आवश्यकतानुसार उन्हें स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से कम उपलब्धि वाले क्षेत्रों की पहचान कर प्रखंडवार कार्ययोजना तैयार करने, गर्भवती महिलाओं का नियमित फॉलोअप करने तथा स्वास्थ्य उपकेंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का निर्देश दिया। समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को संस्थागत प्रसव के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं की नियमित प्रसवपूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की पहचान एवं निगरानी, सुरक्षित मातृत्व सेवाओं तथा प्रसव के बाद मां एवं नवजात की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। उपायुक्त ने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाते हुए यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी गर्भवती महिला को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त करने में कठिनाई न हो। दौरान सिविल सर्जन डॉ. एससी शर्मा, सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. ताराशंकर झा, संबंधित प्रखंडों के प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।



