राष्ट्रीय

ओमान में भारत की एंट्री

बनाएगा 1000 किमी. वाला काल ड्रोन

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की आईजी डिफेंस और ओमान की एमएसए ग्लोबल ने एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इसके तहत ओमान में भारतीय तकनीक से घातक अटैक ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम्स का सह-विकास और निर्माण किया जाएगा। यह साझेदारी पूरे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगी।
पश्चिम एशिया में इस वक्त जो हालात बने हुए हैं, उसने पूरी दुनिया की सुरक्षा प्राथमिकताओं को बदल कर रख दिया है। ईरान से जुड़े तनाव, लगातार होते ड्रोन हमले और लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक मंडराते खतरे इन सब ने खाड़ी देशों को अपनी रक्षा तैयारियों पर नए सिरे से सोचने को मजबूर कर दिया है। लेकिन इसी तनाव के बीच एक ऐसी बड़ी खबर सामने आई है जिसने अंतरराष्ट्रीय डिफेंस मार्केट में भारत की बढ़ती धमक को साबित कर दिया है। भारत की एक डिफेंस कंपनी नोएडा स्थित आईजी डिफेंस ने ओमान की कंपनी एमएसए ग्लोबल के साथ एक ऐतिहासिक समझौता यानी एमओयू किया है। ओमान में भारत के घातक अटैक ड्रोंस और काउंटर ड्रोन सिस्टम्स का सह विकास और स्थानीय स्तर पर निर्माण और सबसे बड़ा आकर्षण है। भारत का 1000 कि.मी. रेंज वाला लॉन्ग रेंज वन वे स्ट्राइक ड्रोन। यानी अब भारतीय तकनीक ना केवल खाड़ी देशों के आसमान की सुरक्षा करेगी बल्कि ओमान की जमीन से तैयार होकर पूरे मिडिल ईस्ट के बाजार में उतरेगी। दरअसल खबर की बारीकियों में जाने से पहले उस पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है जहां यह डील हुई है। हाल के महीनों में ईरान, उसके समर्थित गुटों और अन्य क्षेत्रीय ताकतों के बीच संघर्ष ने आधुनिक युद्ध का एक नया चेहरा दिखाया है और वह चेहरा है सस्ते, मारक और झुंड में हमला करने वाले ड्रोनस, चाहे तेल प्रतिष्ठानों पर हमले हो, वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना हो या सैन्य ठिकानों पर प्रहार, ड्रोन्स ने पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
ओमान जो अरब सागर और ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है, हमेशा से एक शांत और रणनीतिक मध्यस्थ देश रहा है। लेकिन भौगोलिक दृष्टि से वह ठीक उस संवेदनशील समुद्री गलियारे के करीब है जहां से दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई और ओमान जैसे गल्फ कन आॅपरेशन काउंसिल देशों ने यह महसूस किया है कि वे अब केवल पश्चिमी देशों से आने वाले अरबों डॉलर के महंगे हथियारों पर निर्भर नहीं रह सकते। उन्हें ऐसी स्वदेशी, आधुनिक और लागत प्रभावी तकनीक चाहिए जो ड्रोन हमलों को रोक भी सके और जरूरत पड़ने पर सटीक जवाबी हमला भी कर सके और यहीं पर भारत की नई पीढ़ी की डिफेंस कंपनियों की एंट्री होती है। मस्किट में आयोजित एक विशेष रक्षा उद्योग कार्यक्रम में यह ऐतिहासिक एमओय साइन हुआ। यह कार्यक्रम यूं ही नहीं हुआ। इसे भारत के रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग और फेडरेशन आॅफ इंडियन चेंबर्स आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के सहयोग से आयोजित किया गया था। यानी इस साझेदारी को भारत सरकार का पूरा रणनीतिक और कूटनीतिक समर्थन हासिल है।
इस समझौते पर आईजी डिफेंस के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्व संघप्रिया और ओमान की एमएसए ग्लोबल के चेयरमैन कर्नल एम एस एटवाल रिटायर्ड ने हस्ताक्षर किए। इस साझेदारी का सीधा उद्देश्य है भारत की स्वदेशी इंजीनियरिंग और रक्षा क्षमता को ओमान के औद्योगिक ढांचे के साथ जोड़ना। एमएसए ग्लोबल के चेयरमैन कर्नल अटवाल ने इस मौके पर साफ शब्दों में कहा कि खाड़ी में बदलते सुरक्षा माहौल ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर मजबूत रक्षा क्षमताएं विकसित करना कितना जरूरी हो गया है।
भारतीय इंजीनियरिंग और ओमान की विनिर्माण क्षमता का यह मेल आने वाले समय में पूरे जीसी सी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करेगा। अब बात करते हैं उस कोर टेक्नोलॉजी की जिसे लेकर यह समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत आईजी डिफेंस के तीन प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को ओमान में सह विकसित और स्थानीय रूप से निर्मित करने की योजना है। चलिए अब जानते हैं वो तीन घातक हथियार जो ओमान में बनेंगे।

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