बाराबंकी
साईं भजनों की भक्तिरसपूर्ण प्रस्तुतियों से गूंजा देवा मेला, उमाशंकर महाराज ने बांधा समां
मधुर स्वर, भावपूर्ण गायन और साईं बाबा की महिमा से सराबोर भजनों ने श्रोताओं को किया भावविभोर, देर तक भक्तिरस में झूमते रहे श्रद्धालु

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बाराबंकी। देवा मेला एवं प्रदर्शनी-2026 की सांस्कृतिक संध्या में शुक्रवार को भक्ति संगीत की ऐसी सुरमयी छटा बिखरी कि पूरा वातावरण साईंमय हो उठा। सुप्रसिद्ध साईं भजन गायक उमाशंकर महाराज ने अपनी मधुर स्वर-साधना, भावपूर्ण गायन और भक्तिरस से ओतप्रोत प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति से अभिसिंचित कर दिया। उनके भजनों में साईं बाबा के प्रति अटूट श्रद्धा, समर्पण और प्रेम की भावधारा प्रवाहित होती रही।
भजन संध्या का आगाज साईं महिमा के गुणगान से हुआ। उमाशंकर महाराज ने ‘साईं तेरी दया का मुझे दान मिल रहा है, जाता हूं मैं जिधर भी सम्मान मिल रहा है’ भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इसके बाद ‘मुझे अब डर नहीं है किसी और से, मेरे बाबा खड़े हैं मेरी ओर से’ की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं के मन में विश्वास और समर्पण की भावना को और प्रगाढ़ किया।
वहीं, ‘यह कैसी लगन बाबा तुमने हमको लगा दी है, घर-बार तो चीज है क्या सारी दुनिया भुला दी है’ जैसे भावपूर्ण भजन ने साईं भक्ति की गहराई को सुरों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। इसके साथ ही ‘आते-जाते हुए गुनगुनाया करो, साईं बोला करो, साईं गाया करो’ की प्रस्तुति पर श्रोता भक्ति के रंग में सराबोर होकर झूम उठे। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद तालियों की गड़गड़ाहट से पंडाल गुंजायमान होता रहा।
उमाशंकर महाराज की गायकी में सुरों की मधुरता के साथ भक्ति की सहज अनुभूति और भावों की गहनता का अद्भुत समन्वय दिखाई दिया। उनके भजनों ने श्रोताओं को केवल संगीत का आनंद ही नहीं दिया, बल्कि श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना के भावों से भी जोड़ दिया।
साईं भजनों की इस सुरमयी संध्या ने देवा मेला के सांस्कृतिक आयोजन को एक विशिष्ट आध्यात्मिक रंग प्रदान किया। देर तक श्रोता भक्ति संगीत की रसधारा में डूबे रहे और उमाशंकर महाराज की प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना करते नजर आए।



