सिंगरौली

सरई रेलवे स्टेशन के कोल यार्ड में क्षमता से कई गुना अधिक कोयला परिवहन का आरोप

 आरटीआई दस्तावेजों के आधार पर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। जिले के सरई रेलवे स्टेशन स्थित कोल यार्ड में कोयले के भंडारण और परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। कांग्रेस नेता अरुण जायसवाल ने आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से निर्धारित क्षमता की अनुमति मिलने के बावजूद यार्ड से उससे कई गुना अधिक मात्रा में कोयले का परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने रेलवे प्रशासन, संबंधित कंपनियों और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
अरुण जायसवाल के अनुसार, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थापना सहमति आदेश क्रमांक CTE-64580 में सरई ग्राम रेलवे स्टेशन (SGAM) स्थित कोल यार्ड के लिए प्रतिवर्ष अधिकतम 4.80 लाख मीट्रिक टन कोयले की लोडिंग और परिवहन की अनुमति का उल्लेख है। इसके विपरीत, उनका दावा है कि चालू वित्तीय वर्ष में रेलवे के वाणिज्य विभाग को इस यार्ड से 122.59 करोड़ रुपये से अधिक का मालभाड़ा राजस्व प्राप्त हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने अनुमान जताया है कि यहां से सालाना करीब 25 से 30 लाख मीट्रिक टन कोयले का परिवहन हो रहा है। हालांकि, इस अनुमान और वास्तविक परिवहन मात्रा की पुष्टि के लिए रेलवे तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।
यात्री प्लेटफॉर्म पर कोयला रखने का आरोप
कांग्रेस नेता ने सरई रेलवे स्टेशन के यात्री प्लेटफॉर्म क्रमांक 2 पर कोयला डंप किए जाने और भारी वाहनों की आवाजाही का भी मुद्दा उठाया है। उनका आरोप है कि मैसर्स एसीसी लिमिटेड, मैसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड और मैसर्स ईस्ट वैली माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों को कोयला परिवहन की सुविधा देने के लिए यात्री प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ सुरक्षा और प्रदूषण संबंधी खतरे भी पैदा हो रहे हैं। उन्होंने रेलवे प्रशासन से स्पष्ट करने की मांग की है कि यात्री प्लेटफॉर्म पर कोयला रखने और माल परिवहन से जुड़ी गतिविधियों की अनुमति किस आधार पर दी गई है।
धूल और प्रदूषण से स्थानीय आबादी परेशान
अरुण जायसवाल का कहना है कि कोल यार्ड में पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। उनके मुताबिक, कोयले के भंडारण और परिवहन के दौरान धूल रोकने के लिए विंड ब्रेकिंग दीवार, वॉटर कैनन, मिस्ट फॉगर और वाहनों को तिरपाल से ढकने जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं दिखाई दे रही हैं। इसके कारण आसपास की आबादी, स्कूली बच्चों और रेलवे यात्रियों को धूल के गुबार का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने भूजल की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि खुले में कोयला डंप किए जाने से वर्षा के पानी के साथ प्रदूषक तत्व जमीन में पहुंचने की आशंका है, जिससे आसपास के जलस्रोत प्रभावित हो सकते हैं। इस संबंध में भूजल के नमूनों की जांच और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
एनजीटी तक मामला ले जाने की चेतावनी
कांग्रेस नेता अरुण जायसवाल ने कहा कि यदि कोल यार्ड की वास्तविक परिवहन क्षमता, प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम और यात्री प्लेटफॉर्म के उपयोग की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे क्षेत्र की जनता के साथ आंदोलन करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और न्यायालय तक ले जाया जाएगा।अब इस पूरे मामले में रेलवे प्रशासन, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित कंपनियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि कोल यार्ड से वास्तव में कितनी मात्रा में कोयले का परिवहन हो रहा है, निर्धारित अनुमति का पालन किया जा रहा है या नहीं और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप सभी व्यवस्थाएं मौजूद हैं या नहीं। स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के मद्देनजर प्रशासन से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा की जा रही है।शीर्षक को अधिक संयमित बनाएंआरोप और तथ्यों को अलग करें।
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