सिंगरौली

भाजपा पार्षद के घर वन विभाग की लगातार 2 दिन कार्रवाई

साल की लकड़ी बरामद होने से सरई में मचा हड़कंप

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। जिले के सरई क्षेत्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पार्षद रमापति जायसवाल के घर वन विभाग की लगातार 2 दिनों तक चली कार्रवाई से क्षेत्र में हलचल मच गई है। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में बेशकीमती साल की लकड़ी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। सरई रेंजर योगेंद्र तिवारी ने फोन पर वन विभाग की कार्रवाई की पुष्टि की है। हालांकि, बरामद लकड़ी की कुल मात्रा, उसकी बाजार कीमत और उसके स्रोत को लेकर आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।लगातार 2 दिनों तक हुई कार्रवाई के बाद मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज कर दी है। सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में साल की लकड़ी पार्षद के परिसर तक कैसे पहुंची और क्या उसके संग्रहण एवं परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज मौजूद थे। वन विभाग की जांच में इन पहलुओं का स्पष्ट होना जरूरी है।
लकड़ी के स्रोत और दस्तावेजों की जांच जरूरी
साल की लकड़ी बेशकीमती वन संपदा मानी जाती है। ऐसे में बरामद लकड़ी कहां से लाई गई, किससे खरीदी गई और उसके परिवहन की अनुमति थी या नहीं, इसकी जांच महत्वपूर्ण है। लगातार 2 दिनों तक कार्रवाई होने के कारण यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या परिसर में लकड़ी का बड़ा भंडार मौजूद था और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
स्थानीय स्तर पर कथित अवैध लकड़ी कारोबार और संभावित नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, फिलहाल किसी संगठित गिरोह या राजनीतिक संरक्षण की पुष्टि करने वाली जानकारी सामने नहीं आई है। इन पहलुओं पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
वन विभाग की जांच पर टिकी निगाहें
क्षेत्रवासियों के बीच चर्चा है कि वन विभाग की कार्रवाई केवल लकड़ी जब्त करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि लकड़ी के स्रोत, वैध दस्तावेजों, परिवहन और इसमें शामिल संभावित लोगों की भी पड़ताल होनी चाहिए। विभाग को बरामद लकड़ी की मात्रा और अनुमानित कीमत की जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि कार्रवाई की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।मामले में भाजपा संगठन और संबंधित पार्षद का पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। फिलहाल वन विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बरामद लकड़ी का भंडारण वैध था या वन नियमों का उल्लंघन किया गया है।
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