भरत पुर
गणगौर पूजन में गुना का पौराणिक महत्व ,गुना बनाने में जुटे हलवाई
भगवान शिव और माता पार्वती को लगया जाता है गुना का भोग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
भरतपुर। भरतपुर जिले के एतिहासिक भुसावर कस्बे सहित उपखण्ड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में यूं तो कई पर्व त्यौहार हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार समय-समय पर मनाएं जाते हैं क्योंकि कई धर्म के लोग रहते हैं। इन्हीं परम्पराओं में शुमार सोलह दिनों तक अनवरत चलने वाला एवं खेलने वाला ऐतिहासिक पारम्परिक त्यौहार गणगौर पूजन में विभिन्न समाजों की महिलाएं अपने पति अथवा होने वाले पति को लेकर भगवान शिवजी (ईसर) और माता पार्वती (गौरा) की पूजा अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी जाती है। वहीं गणगौर एक और बजह से जाना जाता है जहां इस पर्व में ख़ास मिठाई बनाई जाती है,, गुना। जो कि साल भर में एक बार ही मिलता है। ज़हां महिला श्रद्धालु भगवान शिव और माता पार्वती जी की पूजा अर्चना करते हुए भगवान से परिवार में सुख-शांति समृद्धि एवं क्षेत्र में खुशहाली की मनोकामनाएं मांगी जाती है। वहीं कस्बे के हिंडौन सड़क मार्ग स्थित रामद्वारा के पास अग्रवाल मिष्ठान भंडार, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के पास सैनी मिष्ठान भंडार सहित अन्य मुख्य बाजार, पुरानी सब्जी मण्डी ऊपरला बाजार, पुरानी अनाज मण्डी सहित विभिन्न बाजारों में हलवाई गणगौर पूजन में माता पार्वती जी और शिव जी को भोग लगाने के लिए एवं सुहाग के प्रतीक पारम्परिक ऐतिहासिक मिठाई गुना बनाने में जुट गए हैं। जहां वे रोज़गार युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो रहा है। वहीं दूसरी ओर विद्वान पण्डित पुष्पेन्द्र मिश्रा, राघवेन्द्र शर्मा, महेश चन्द शर्मा, रोहित ने जानकारी देते हुए बताया कि गणगौर पर्व की शुरुआत वैसे तो होली के अगले दिन से शुरू हो जाती है और सोलह दिनों तक अनवरत चलती है,, लेकिन चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर गणगौर पर्व का खास महत्व होता है,, जहां इस वर्ष गणगौर पूजा शनिवार 21 मार्च 2026 को की जाएगी। वहीं उन्होंने बताया कि गणगौर शब्द का अर्थ शिव और गौरी से मिला हुआ है,, इस लिए यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, वैवाहिक जीवन और समपर्ण को दर्शाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु की कामना और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस व्रत रखकर पूजा अर्चना करती है।



