
नहर भूमि पर अवैध कब्जे, उगाही के आरोप; नोटिस सिर्फ कागजों तक सीमित
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लोनी का नाम शामिल होने के बाद क्षेत्र के आम जनमानस में चिंता और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बावजूद इसके, प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करने वाले संबंधित विभाग अब भी निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
स्थानीय शिकायतकर्ता सोहनबीर सिंह और अन्य लोगों का आरोप है कि नगर पालिका, नहर विभाग और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां बेखौफ जारी हैं। ग्रीन बेल्ट और नहर की भूमि पर अवैध कब्जों के कारण न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि अवैध कारोबार भी खुलेआम फल-फूल रहा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि नहर पर अवैध रूप से कब्जा जमाए लोगों से प्रति माह दस-दस हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। यही कारण है कि नहर विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अतिक्रमण हटाने के नोटिस भी केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाते हैं और जमीनी स्तर पर कोई प्रभाव नहीं दिखता।
प्रदूषण के प्रमुख कारण:
नहर और ग्रीन बेल्ट पर अवैध अतिक्रमण
अवैध कारोबार और कचरे का अनुचित निस्तारण
खुले में कचरा फेंकना और जलाना
धूल और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण का अभाव
प्रशासनिक लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बार-बार जनसुनवाई पोर्टल और अन्य माध्यमों से शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इससे न केवल पर्यावरण संकट गहरा रहा है, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्षेत्रवासियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों और अवैध अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि लोनी को बढ़ते प्रदूषण के संकट से राहत मिल सके।


