अंतरराष्ट्रीय

पाक में वार्ता पर संशय के बादल

पहले बैठक वाला सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट किया, अब यूरेनियम पर पेंच फंसा रहा ईरान

तेहरान। ईरान के परमाणु प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने साफ किया है कि यूरेनियम संवर्धन का अधिकार ही अमेरिका के साथ होने वाली शांति वार्ता की मुख्य शर्त है। दूसरी ओर, लेबनान पर इस्राइल के बढ़ते हमलों और होर्मुज बंद होने के बाद युद्धविराम की सफलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और इस बीच घोषित युद्धविराम अब एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है। ईरान की परमाणु एजेंसी के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने गुरुवार को स्पष्ट कर दिया कि परमाणु कार्यक्रम के तहत यूरेनियम संवर्धन का अधिकार बचाए रखना अमेरिका के साथ किसी भी समझौते के लिए अनिवार्य शर्त है।
युद्धविराम पर मंडराते संकट के बादल- 28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण युद्ध को रोकने के लिए जिस युद्धविराम की घोषणा की गई थी, वह फिलहाल लड़खड़ाता नजर आ रहा है। दरअसल, पाकिस्तान में नियुक्त ईरानी राजदूत रजा अमीरी मुगाद्दम ने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर वार्ता के लिए प्रतिनिधिमंडल के आगमन वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटा दी है। यह पोस्ट हटाए जाने के बाद वार्ता के आयोजन पर संशय और सस्पेंस गहरा गया है, जिससे पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
इन वजहों से टल सकता है सीजफायर-हालांकि, सिर्फ यही कारण नहीं हैं। इससे पहले युद्धविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद इस्राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर जोरदार हमले किए। बुधवार का दिन इस युद्ध का सबसे खूनी दिन साबित हुआ। इस्राइली हमले में 250 से अधिक लोग मारे गए। ईरान का दावा है कि युद्धविराम में लेबनान भी शामिल था, जबकि इस्राइल और अमेरिका इससे इनकार कर रहे हैं।
इसके इतर, दुनिया के 20 फीसदी तेल व्यापार के लिए अहम होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण बरकरार है। लेबनान पर हुए हमले के बाद ईरान ने इसे फिर से बंद कर दिया है। ईरानी एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि अगर लेबनान पर हमले नहीं रोके गए तो होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। दूसरी ओर ट्रंप ने एक बार फिर से चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर ईरान ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, तो उसे पहले से भी कहीं अधिक घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा।
सऊदी और ईरानी विदेश मंत्री ने की फोन पर चर्चा -खबर है कि पाकिस्तान में होने वाली निर्णायक शांति वार्ता से ठीक पहले सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। दोनों देशों के विदेश मंत्री ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को घटाने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने के रास्तों पर गहन मंथन किया। ऐसे समय में जब लेबनान पर इस्राइली हमलों और होर्मुज की घेराबंदी ने युद्धविराम को खतरे में डाल दिया है, ईरान का सऊदी अरब से संपर्क करना यह संकेत देता है कि वह वार्ता की मेज पर जाने से पहले क्षेत्रीय शक्तियों के साथ तालमेल बिठाने और कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें -होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 98.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। यह युद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 35% की बढ़त है। हालांकि ईरान ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत जहाजों को जाने देगा, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी आक्रामकता बंद करनी होगी। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर टिकी हैं। क्या परमाणु संवर्धन और लेबनान में छिड़ी जंग के बीच शांति का कोई रास्ता निकलेगा, या यह युद्धविराम महज एक अस्थायी विराम साबित होगा?

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