मेरठ
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा है : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
नई तकनीक, शोध और नवाचार अपनाकर ही साकार होगा विकसित भारत का सपना, सीसीएसयू के 38वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों का आह्वान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों से शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम न मानते हुए चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब युवा नई तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को अपनाकर समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देंगे।
राज्यपाल ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन गांव, गरीब और किसान के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में 75 प्रतिशत से अधिक पदक छात्राओं ने प्राप्त किए हैं, जो महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, प्रतिभा और परिश्रम का प्रमाण है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से एआई, एनीमेशन, गेमिंग, अंतरिक्ष विज्ञान और अन्य आधुनिक तकनीकों से जुड़े रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने, शोध संस्कृति को मजबूत करने तथा पारंपरिक कला एवं हस्तशिल्प को उच्च शिक्षा से जोड़ने का सुझाव दिया। साथ ही नशामुक्त भारत अभियान, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल शिक्षा को जनभागीदारी का अभियान बनाने पर बल दिया।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि ज्ञान, विज्ञान और नई तकनीक ही भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आजीवन सीखने की प्रवृत्ति बनाए रखने तथा शोध और नवाचार के माध्यम से विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि डिग्री केवल एक प्रमाण-पत्र नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का संकल्प है। उन्होंने विद्यार्थियों से कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता को अपनाते हुए समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया। समारोह में गुजरात की प्रख्यात लोक कलाकार सुश्री रसीलाबेन कांजीभाई डुंगरिया को भारतीय लोककला, हस्तशिल्प संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विश्वविद्यालय की सर्वोच्च मानद उपाधि डी.लिट्. (ऑनोरिस कॉज़ा) से सम्मानित किया गया। दीक्षांत समारोह में उपाधि एवं पदक प्राप्त विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। विश्वविद्यालय परिवार ने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान का आह्वान किया।




