
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। डिजिटल इंडिया और पारदर्शी शासन व्यवस्था के दावों के बीच सिंगरौली में सूचना के अधिकार (आरटीआई) से जुड़ा एक मामला चर्चा में आ गया है। आम आदमी पार्टी के नेता राजेश सोनी ने जनजातीय कार्य विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी थी, लेकिन विभाग की ओर से सूचना उपलब्ध कराने से पहले ₹16,266 जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
राजेश सोनी का कहना है कि सूचना प्राप्त करने के लिए इतनी बड़ी राशि की मांग आम नागरिकों के लिए परेशानी खड़ी करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सूचना के अधिकार अधिनियम की मूल भावना प्रभावित होती है और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य को झटका लगता है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को सरकारी योजनाओं, विभागीय कार्यों और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है। इसी उद्देश्य से सूचना का अधिकार कानून लागू किया गया था, ताकि शासन व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता बनी रहे। ऐसे में सूचना देने के लिए हजारों रुपये की मांग करना आम लोगों की पहुंच को सीमित कर सकता है।
इस मामले के सामने आने के बाद जिले में आरटीआई व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया इतनी महंगी होगी तो आम नागरिक सूचना के अधिकार का प्रभावी उपयोग नहीं कर पाएंगे।
वहीं, जनजातीय कार्य विभाग की ओर से मांगी गई राशि के निर्धारण और इसके आधार को लेकर अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। अब लोगों की नजर विभाग के जवाब और आगे की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।




