गाजियाबाद
विधायक के विकास पत्र में लोनी चमकदार, लेकिन जमीन पर जनता बेहाल!
लोनी के नागरिकों के सामने इन दिनों एक बड़ा सवाल खड़ा है ,जनता विश्वास करे भी तो किस पर करे?
विकास पत्र पर या अपनी आंखों के सामने पसरी क्षेत्र की बदहाली पर?
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : कागजों पर लोनी की सड़कें ऐसी चमचमा रही हैं, जैसे अभी-अभी किसी महानगर से उठाकर लोनी में रख दी गई हों। वादों व तस्वीरों में नालियां साफ दिखाई गई हैं, जबकि सड़कें चौड़ी हैं, बिजली की रोशनी चहुं ओर फैली है और विकास चारों तरफ मुस्कुरा रहा है।लोग सड़कों पर फराटे भरते हुए दौड़ रहे हैं लेकिन जैसे ही नागरिक पोस्टर से नजर हटाकर अपनी गली की तरफ देखता है, हकीकत उसके सपनों पर नहीं, सीधे उसके जूते पर कीचड़ बनकर चिपक जाती है।
जलभराव को भी अब ‘विकास की निशानी’ मान लें?
विकास पत्र का संदेश है “सिर्फ जलभराव की तस्वीर मत देखिए।”
वाह जी क्या बात है!
अब जनता को अपनी आंखों पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।
घुटनों तक पानी हो तो उसे जलभराव मत कहिए, भविष्य की जल-परिवहन व्यवस्था कहिए।
सड़क पर गड्ढा हो तो गड्ढा मत कहिए, विकास की नींव कहिए।
कीचड़ हो तो परेशानी मत मानिए, प्रकृति के साथ विकास का तालमेल समझिए।
और अगर नागरिक फिर भी सवाल करे तो उसे विकास-विरोधी घोषित करने में क्या जाता है?
विधायक जी का विकास। तस्वीरों में फुल स्पीड पर!
विधायक जी के पोस्टर में विकास दौड़ रहा है और लोनी की सड़कों पर जनता फिसल कर गिर रही है।
यह भी कमाल है कि विकास इतना तेज दौड़ रहा है कि जनता उसे पकड़ ही नहीं पा रही।
जनता पूछती है
“सड़क कब बनेगी?”
जवाब,“विकास कार्य चल रहे हैं।”
जनता पूछती है
“नाली कब साफ होगी?”
जवाब “जल निकासी पर योजना बन रही है काम होगा।”
जनता पूछती है
“कब?”
जवाब फिर वही“बहुत जल्द।”
लोनी में शायद “बहुत जल्द” कोई तारीख नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुहावरा है।
सांसद जी दूरदर्शी इतने कि जनता से दूर ही दिखाई दें!
क्षेत्र की जनता अपने सांसद को क्षेत्र में ढूंढती है और सोशल मीडिया पर तस्वीरें खोजती है।
जनता को उम्मीद रहती है कि गाजियाबाद के लोकप्रिय सांसद जी कभी सड़क पर उतरकर लोनी की समस्याएं देखेंगे।
लेकिन शायद विकास की राजनीति में एक नया सिद्धांत आ गया है
“जनता के बीच जाने से बेहतर है जनता के लिए जारी बयान में मौजूद रहना।”लोनी लोकप्रिय सांसद जी ने तो जैसे जनसमस्याओ पर मौन धारण कर लिया हो ।
जनता जलभराव में रास्ता तलाशती रहे और जनप्रतिनिधि विकास की तस्वीरों में रास्ता बनाते रहें ,
लोकतंत्र का यह भी एक अनोखा मॉडल लोनी में देखने को मिल रहा है!
चेयरमैन जी से जनता का मासूम सवाल
नगरपालिका अध्यक्ष जी के कार्यकाल में यदि सड़क पर पानी मिले, कूड़ा मिले, टूटी सड़क मिले और नालियों की समस्या मिले तो जनता आखिर किसे दोष दे?
बारिश को?
मौसम विभाग को?
बादलों को?
या फिर हमेशा की तरह पिछली सरकारों को?
क्योंकि लोनी में जिम्मेदारी का भी अपना मौसम है
काम हुआ तो श्रेय वर्तमान का, समस्या मिली तो विरासत पिछली सरकार की!
पोस्टर में विकास, गलियों में आंसू
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस जनता के नाम पर विकास पत्र छापा गया, उसी जनता की आंखों में पानी क्यों है?
यह पानी बारिश का है या व्यवस्था की विफलता का , विफलता नगरपालिका की या जिला प्रशासन की,इसकी जवाबदेही से जनप्रतिनिधि भी नहीं बच सकते फिर यह तय करना मुश्किल है।
किसका घर जलभराव में घिरा है,
किसकी दुकान तक ग्राहक नहीं पहुंच पा रहा,
किसी का बच्चा कीचड़ में स्कूल जा रहा है,
किसी की गाड़ी गड्ढे में फंस रही है।
और उधर पोस्टर कह रहा है
“जनता का विश्वास, विकास का प्रकाश।”
जनता सोच रही है
“भैया, पहले यह बता दो कि प्रकाश कहां है? हमारी गली में तो पानी और अंधेरा दोनों साथ हैं!”
विकास का नया फार्मूला
लोनी में विकास का फार्मूला शायद कुछ ऐसा हो गया है
घोषणा + पोस्टर + तस्वीर + भाषण = विकास
बस इसमें एक चीज गायब है
जमीन पर दिखाई देने वाला काम।
जनता को अब फीते काटने, शिलान्यास और पोस्टर से ज्यादा जरूरत है चलने लायक सड़क और बहने लायक नाली की।
जनता विश्वास करे भी तो किस पर?
विधायक कहें विकास हो रहा है।
सांसद कहें विकास की योजनाएं आ रही हैं।
चेयरमैन कहें नगरपालिका लगातार काम कर रही है।
और जनता अपनी गली में खड़ी होकर सोचती है
“तीनों की बातों पर विश्वास करें या अपनी आंखों पर?”
क्योंकि नेताओं के भाषणों में लोनी पूरी तरह से बदल चुकी है,
पोस्टरों में लोनी बदल चुकी है,
विज्ञापनों में लोनी बदल चुकी है…
बस एक लोनी ऐसी है जो अब भी नहीं बदली वह लोनी, जिसमें जनता रोज अपनी बदहाली और दुर्दशा के बीच नारकीय जीवन जी रही है।
अब जनता को विकास की तस्वीर नहीं चाहिए।
उसे तस्वीर से बाहर निकलकर जमीन पर उतरता हुआ विकास चाहिए।
क्योंकि बहुत हो गया
“कल सुंदर होगा” का सपना।
जनता अब पूछ रही है
“आज इतना बदहाल क्यों है?”
और शायद यही सवाल किसी भी विकास पत्र से ज्यादा ताकतवर है।


