बालाघाट
बालाघाट में बच्चों की मौत पर उबाल
आदिवासी समाज की अनिश्चितकालीन हड़ताल और बंद से थमी शहर की रफ्तार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कथित तौर पर 27 से अधिक बच्चों की मौत के विरोध में आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। आदिवासी विकास परिषद के आह्वान पर गुरुवार को बालाघाट पूरी तरह बंद रहा। इस दौरान शहर की दुकानें बंद रहीं, बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा और बसों के पहिए थम गए। हालांकि, इस बंद के दौरान स्कूलों और आपातकालीन सेवाओं को मुक्त रखा गया है, जिससे आम जनता को पूरी तरह असुविधा का सामना न करना पड़े।
*स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग*
आदिवासी विकास परिषद के जिलाध्यक्ष दिनेश धुर्वे ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्वास्थ्य मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग, पीएचई विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए।
कुपोषण और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
दिनेश धुर्वे ने आरोप लगाया कि कुपोषण और समय पर टीकाकरण न होने के कारण मासूम बच्चों की जान जा रही है। आदिवासी बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने सवाल उठाया कि आदिवासियों के कल्याण के लिए आने वाले बजट और राशि का आखिर उपयोग कहां हो रहा है? प्रदर्शन में बालाघाट के अलावा प्रदेश के अन्य आदिवासी अंचलों से भी समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए।
*25 लाख मुआवजे की मांग, समाज का तीखा सवाल*
प्रशासन द्वारा मृतक बच्चों के परिवारों को दिए जा रहे 2 लाख रुपए के मुआवजे को आदिवासी समाज ने नाकाफी बताया है। समाज के प्रतिनिधियों ने रोष व्यक्त करते हुए सरकार से पूछा है l
“क्या आदिवासियों की जान की कीमत सिर्फ 2 लाख रुपए है क्या ?”
प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि सरकार प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को 25-25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता तत्काल प्रदान करे। गुरुवार को हुए इस उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, और स्थिति पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है।




