ललितपुर
देवगढ़ की धार्मिक-ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण की उठी मांग
दशावतार द्वार व वे-साइड अमेनिटी का निर्माण जल्द शुरू कराने की मांग

प्राचीन मंदिरों और पुरातात्विक अवशेषों के सर्वेक्षण पर जोर
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। देवगढ़ की प्राचीन धार्मिक, सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत के संरक्षण और क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विकास को लेकर देवगढ़ सनातन धर्मरक्षा समिति (रजि.) ने प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। समिति ने देवगढ़ को प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लंबित परियोजनाओं को गति देने के साथ ही प्राचीन मंदिरों, प्रतिमाओं और पुरातात्विक अवशेषों के संरक्षण की मांग की है। समिति ने पर्यटन विभाग द्वारा प्रस्तावित दशावतार द्वार एवं वे-साइड अमेनिटी का निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है। समिति का कहना है कि यदि वे-साइड अमेनिटी के लिए प्रस्तावित भूमि के स्वामित्व, सीमांकन अथवा किसी अन्य प्रशासनिक या राजस्व संबंधी समस्या के कारण परियोजना लंबित है तो उसका तत्काल निस्तारण कर आवश्यक भूमि उपलब्ध कराई जाए, जिससे निर्माण कार्य में अनावश्यक विलंब न हो। समिति ने नरवराह मंदिर की स्वच्छता, रखरखाव, धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रशासन एवं संबंधित विभागों के समन्वय से समिति को नियमानुसार सहभागी बनाए जाने की मांग भी की है। समिति का कहना है कि स्थानीय धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता से मंदिर की व्यवस्थाओं को और बेहतर किया जा सकता है। समिति ने नरवराह मंदिर सहित देवगढ़ में सनातन परंपरा से जुड़े सभी प्राचीन मंदिरों, धार्मिक स्थलों, प्रतिमाओं और पुरातात्विक अवशेषों का विस्तृत सर्वेक्षण कराने की मांग की है। इसके साथ ही इनके संरक्षण, सुरक्षा, सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास की समुचित कार्ययोजना तैयार करने की बात कही गई है। समिति ने कहा कि देवगढ़ की एक प्राचीन प्रतिमा को जनदबाव के माध्यम से बाहर कराया गया था और उसके उचित संरक्षण एवं पुनर्स्थापना की प्रतीक्षा होना पीड़ादायक है। समिति ने जनभावनाओं तथा देवगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को ध्यान में रखते हुए इस मामले में प्राथमिकता से कार्रवाई करने और आवश्यक प्रस्ताव तैयार कर संबंधित विभागों को भेजने की मांग की है। समिति ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य देवगढ़ की सनातन धार्मिक परंपरा, ऐतिहासिक धरोहर और पुरातात्विक महत्व को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढय़िों के लिए संरक्षित करना है। साथ ही क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देकर देवगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना समिति की प्राथमिकता है। इस दौरान समिति संरक्षक डा.प्रबल सक्सैना, अध्यक्ष आचार्य पं. रवि तिवारी देवगढ़, भरत रिछारिया, चंद्रशेखर दुबे, रामेश्वर मालवीय, ब्रजेंद्र सिंह गौर आदि उपस्थित रहे।



