लोनी में बदहाल मार्ग और बेकाबू अतिक्रमण, ‘रेंगने’ को मजबूर पैदल लोगों की जिंदगी
फुटपाथ पर कब्जा, सड़कों पर दुकानें और रेहड़ी-पटरी से सिकुड़े रास्ते; अवैध वसूली के आरोपों ने उठाए पुलिस की भूमिका पर सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले लोनी बॉर्डर क्षेत्र में बदहाल सड़कें, बेतरतीब अतिक्रमण, बारिश से जलभराव और लगातार बढ़ते यातायात दबाव ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गाजियाबाद-लोनी मार्ग, दिल्ली-सहारनपुर मार्ग, लोनी तिराहा, इंद्रा मार्केट, लोनी बॉर्डर और शिव विहार मेट्रो स्टेशन के आसपास की स्थिति ऐसी है कि सड़क पर वाहन चलाना ही नहीं, पैदल निकलना भी चुनौती बन गया है। सड़क के एक हिस्से पर गड्ढे और दूसरे हिस्से पर दुकानदारों तथा रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा होने के कारण यातायात व्यवस्था दिनभर चरमराई रहती है।
हल्की बारिश में सड़क या तालाब, गड्ढों में छिप जाता है खतरा
लोनी के इंद्रपुरी, शांति नगर, जवाहर नगर, गुलाब वाटिका सहित कई इलाकों में मुख्य एवं संपर्क मार्गों की हालत खराब बताई जा रही है। बारिश होने के बाद स्थिति और गंभीर हो जाती है। जलभराव के कारण सड़क के गहरे गड्ढे दिखाई नहीं देते और दोपहिया वाहन चालक दुर्घटना का शिकार होने का जोखिम उठाते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कई स्थानों पर सीवर लाइन से संबंधित खुदाई और सड़क की मरम्मत का काम पूरा नहीं होने से समस्या और बढ़ गई है। जलभराव के दौरान स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। आपातकालीन वाहनों के आवागमन पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
फुटपाथ पर कब्जा, पैदल यात्री सड़क पर चलने को मजबूर
लोनी के प्रमुख बाजारों में फुटपाथ का बड़ा हिस्सा दुकानों के आगे बढ़े शेड, तख्त, सामान और अस्थायी ढांचों की वजह से उपयोग के योग्य नहीं रह गया है। लोनी तिराहा बाजार, इंद्रा मार्केट नंबर-2 और लोनी बॉर्डर क्षेत्र में कई जगह दुकानदारों द्वारा सड़क की ओर सामान फैलाए जाने की शिकायतें स्थानीय लोगों द्वारा की जाती हैं।
इसके अलावा फुटपाथ और सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगने से बची हुई जगह भी लगातार कम हो रही है। नतीजा यह है कि पैदल यात्रियों को मजबूरी में वाहनों के बीच मुख्य सड़क पर चलना पड़ता है। व्यस्त मार्गों पर यह स्थिति दुर्घटना का खतरा बढ़ाती है।
अतिक्रमण हटता है, लेकिन कुछ ही समय बाद फिर लौट आता है
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन, नगर पालिका और पुलिस द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए जाते हैं। अभियान के दौरान सड़क किनारे रखे सामान और अस्थायी अतिक्रमण हटाए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई समाप्त होने के बाद कुछ समय में वही स्थिति दोबारा दिखाई देने लगती है।
इससे कार्रवाई की स्थायित्व और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। लोगों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाने के बाद नियमित निगरानी की जाए और दोबारा कब्जा करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई हो तो समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
पुलिस की भूमिका पर भी स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
अतिक्रमण के बीच स्थानीय लोगों की ओर से पुलिस की भूमिका को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे और फुटपाथ पर रेहड़ी-पटरी लगवाने तथा उन्हें हटाने या न हटाने के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली का खेल चलता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष इस संबंध में सामने आना बाकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मुख्य मार्गों और फुटपाथ पर अवैध कब्जे वास्तव में नियमों के विरुद्ध हैं, तो फिर उन पर लंबे समय तक कार्रवाई क्यों नहीं होती? लोगों का यह भी सवाल है कि बार-बार अभियान चलने के बावजूद अतिक्रमण दोबारा कैसे कायम हो जाता है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होने की मांग भी उठ रही है।
दुकानदारों से लेकर रेहड़ी-पटरी तक, सड़क का बड़ा हिस्सा घिरा
लोनी में अतिक्रमण की समस्या केवल रेहड़ी-पटरी तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों के मुताबिक कई स्थानों पर स्थायी दुकानों के बाहर बनाए गए शेड, चबूतरे, तख्त और सड़क की ओर फैलाया गया सामान भी यातायात के लिए उपलब्ध स्थान को कम करता है। इसके बाद उसी संकरे हिस्से में रेहड़ी-पटरी लगने और वाहन खड़े होने से सड़क और अधिक सिकुड़ जाती है।
इसका सीधा असर पैदल यात्रियों पर पड़ता है। फुटपाथ उपलब्ध न होने के कारण उन्हें सड़क पर चलना पड़ता है और तेज रफ्तार वाहनों के बीच उनकी सुरक्षा का खतरा बना रहता है।
रेंगता यातायात, 10 मिनट का सफर घंटों में
लोनी बॉर्डर से लोनी गोल चक्कर, शिव विहार मेट्रो स्टेशन होते हुए लोनी की ओर आने-जाने वाले लोगों के लिए यातायात जाम रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। सड़क की खराब हालत, अतिक्रमण, सड़क किनारे खड़े वाहन और बढ़ता यातायात दबाव मिलकर कई स्थानों पर जाम की स्थिति पैदा करते हैं।
स्थानीय यात्रियों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में कुछ ही मिनट में पूरा होने वाला सफर जाम के समय काफी लंबा हो जाता है। वाहनों के रेंगने से लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं। धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं स्थिति को और खराब करता है।
प्रदूषण और ग्रीन बेल्ट पर कब्जे का मुद्दा भी गंभीर
लोनी में यातायात और धूल के साथ प्रदूषण भी लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष भी लोनी में प्रदूषण और ग्रीन बेल्ट से जुड़े मामलों पर कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे उठते रहे हैं। ऐसे में सड़कों की खराब स्थिति और धूल उड़ने की समस्या को केवल यातायात का विषय मानना पर्याप्त नहीं होगा।
ज्ञापन और चेतावनियों के बावजूद स्थायी समाधान का इंतजार
स्थानीय संगठनों और नागरिकों की ओर से बदहाल सड़कों, जलभराव और अतिक्रमण को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन दिए जाने तथा आंदोलन की चेतावनी दिए जाने की बात कही जाती रही है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर अलग-अलग विभागों की भूमिका सामने आती है, जबकि अतिक्रमण हटाने में नगर पालिका और पुलिस की जिम्मेदारी बनती है। नागरिकों का कहना है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आखिरकार आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
अब अभियान नहीं, स्थायी व्यवस्था की दरकार
लोनी के लोगों का कहना है कि समस्या का समाधान केवल एक-दो दिन बुलडोजर चलाने से नहीं होगा। मुख्य मार्गों की वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत, जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था, फुटपाथ को अतिक्रमणमुक्त कर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाना, रेहड़ी-पटरी के लिए निर्धारित स्थान तय करना और दोबारा अतिक्रमण होने पर तत्काल कार्रवाई जरूरी है।
साथ ही, पुलिस या किसी अन्य कर्मचारी पर अवैध वसूली के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाने की मांग भी उठ रही है। सवाल अब यह है कि दिल्ली से सटे लोनी में आम नागरिक को सड़क, फुटपाथ और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आखिर कब तक इंतजार करना पड़ेगा? प्रशासन यदि स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाता है तो बदहाल सड़क, अतिक्रमण और जाम की यह त्रिमूर्ति लोनीवासियों की रोजमर्रा की जिंदगी को इसी तरह प्रभावित करती रहेगी।

