ललितपुर
डीएम को ज्ञापन देकर अपने पट्टे की जमीन को कब्जाधारियों से मुक्त करने की उठाई मांग
कई बार प्रार्थना पत्र देने के बाद भी बुजुर्ग दंपति की नहीं हो रही सुनवाई

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
ललितपुर। अपनी आंखों में न्याय मिलने की उम्मीद की एक किरण लेकर एक बार फिर बुजुर्ग असहाय दंपति क्लैक्ट्रेट परिसर पहुंचा, जहां उसने एक बार फिर जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर अपनी पट्टे की जमीन को दबंग विपक्षियों के कब्जे से मुक्त करने की मांग उठाई। पीडित दंपति का – आरोप है कि वह तहसील स्तर से लेकर जिला प्रशासन तक कई शिकायती पत्र दे चुका है और समाधान दिवस में भी वह अधिकारियों से अपनी जमीन कब्जा मुक्त करने की गुहार लगा चुका है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही। तो फिर सवाल यह पैदा होता है कि साहब आखिर इस बुजुर्ग दंपति की पट्टे की जमीन कब कब्जा मुक्त कराई जाएगी।
थाना सौजना क्षेत्र के स्थानीय कस्बा निवासी बुजुर्ग मनका पुत्र रजुआ अहिरवार अपनी पत्नी के साथ मंगलवार को क्लैक्ट्रेट परिसर करीब 11:30 बजे उस समय उपस्थित हुआ, जब अधिकारी कार्यालय में नहीं थे। इस दौरान बुजुर्ग दम्पत्ति ने वहां मौजूद कर्मचारियों को प्रार्थना पत्र देकर वर्षों से लंबित पड़ी अपनी जमीन को नपवाने की मांग उठाई। इस दौरान बुजुर्ग दम्पत्ति द्वारा दिए गए शिकायती पत्र में अवगत कराया गया है कि पूर्व में उसे सौजना गाँव में नियमानुसार आरजी संख्या 1895/7 रकवा 40 डिसमिल और 2092/6 रकवा 3.35 एकड़ का पट्टा दिया गया था, लेकिन इस जमीन की नाप ना हो पाने के कारण उसे कब्जा नहीं मिल पाया था, जबकि कुछ विपक्षी उसे पर अवैध रूप से कब्जा जमाये हुये है। वह पिछले कई वर्षों से अपनी जमीन की नाप करने और कब्ज दिलाए जाने के संबंध में तहसील स्तर से लेकर जिला प्रशासन का ज्ञापन दे चुका है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। पीडित ने यह भी बताया कि उसके बच्चे उसे अपने साथ नहीं रखते, जिस कारण उसे अपनी गुजर बसर करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पीड़ित दंपति ने यह भी बताया कि उसके पुत्रों ने उसे घर से बाहर निकाल दिया है और उसके पास अजीविका चलने का कोई और साधन नहीं है,
जिस कारण वह अपनी गुजर बसर नहीं कर पा रहा है। इस ज्ञापन के माध्यम से पीड़ित ने अपनी जमीन की जल्द से जल्द नाप कर कर उसे कब्जा दिलाए जाने की मांग उठाई ताकि वह अपनी गुजर बसर चला सके। अब सवाल यह पैदा होता है कि जब असहाय बुजुर्ग पीडित दम्पत्ति अधिकारियों के इतने चक्कर सालों से लग रहा है तो आखिरकार इस इंसाफ क्यों नहीं मिल पाया है क्या अधिकारी शासनादेशों का पालन नहीं करते जिसमें प्रदेश सरकार ने स्वयं अवैध कब्जों की शिकायतों को तत्काल निस्तारित करने के लिए अपने अधिकारियों को निर्देशित किया, या फिर बुजुर्ग की पहुंच उच्च स्तर के अधिकारियों तक नहीं है जिस कारण उनके कानों तक बुजुर्ग दंपति की यह गुहार नहीं पहुंच पा रही है। कारण कुछ भी हो फिलहाल इस बुजुर्ग दंपत्ति को न्याय मिलना ही चाहिए।



