बागपत

महामंडल शांति विधान का आठवां दिन –

आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज ने जिनेंद्र देव की आराधना को बताया सर्व दुःखों का नाशक

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बड़ौत। नगर में आयोजित महामंडल शांति विधान का आज आठवां दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के वातावरण में संपन्न हुआ। विधान के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना की और विश्व शांति, समृद्धि व आत्मशुद्धि की कामना की।

इस अवसर पर आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा,
“जिनेंद्र देव के चरण सर्व प्रकार के मनोरथों को पूर्ण करने वाले हैं, वे काम विकार को जलाने वाले हैं और जीवन के समस्त दुखों का विनाश करने की शक्ति रखते हैं।”
उन्होंने कहा कि यदि हम श्रद्धा और समर्पण भाव से नित्य उनके चरण कमलों की पूजा करें, तो मानसिक और आध्यात्मिक रूप से शुद्धि की ओर अग्रसर हो सकते हैं। भौतिक जीवन की अनेक समस्याएं भी स्वयं ही हल होती जाती हैं।

महामंडल शांति विधान का संचालन पंडित अशोक जी के विद्वतापूर्ण सान्निध्य में हो रहा है। दिन की शुरुआत मंत्रोच्चारण, अभिषेक और पूजन विधानों से हुई। भक्तों ने शांतिपूर्वक मंडल पूजन किया और भगवान शांतिनाथ की भव्य आरती में भाग लिया। मंडप में भक्ति रस का ऐसा संचार हुआ कि उपस्थित हर श्रद्धालु आत्मविभोर हो उठा।

शांति विधान बना श्रद्धा और साधना का केंद्र

पूरे आयोजन स्थल को सुंदर रंगोली, तोरण द्वार और पुष्प सज्जा से अलंकृत किया गया है। श्रद्धालु न केवल नगर से बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। प्रतिदिन विशेष धार्मिक प्रवचन, पूजन, ध्यान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
कार्यक्रम समिति के अनुसार, आने वाले दिनों में भी विधान की विविध धार्मिक गतिविधियां और पूजा-अर्चनाएं जारी रहेंगी।

महामंडल शांति विधान केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का वह मंच बन चुका है, जो आज के भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक उन्नति की राह दिखाता है। आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज के आध्यात्मिक प्रवचनों ने लोगों को भीतर से छूकर एक नई दिशा दी है।

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