
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। जिले की विकास योजनाओं की धुरी माने जाने वाले विकास भवन परिसर की हालत यह है कि यहां पीने के पानी का एक भी ठोस इंतजाम मौजूद नहीं है। परिसर में लगा इकलौता सरकारी हैंडपंप वर्षों से खराब है, वहीं ग्राम सचिवों के सहयोग से लगाया गया आरओ प्लांट भी बीते एक साल से बंद पड़ा है।
तेज गर्मी और उमस के बीच, यहां आने वाले ग्रामीणों, अधिकारियों, कर्मचारियों और आगंतुकों को पीने के पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
विकास भवन में तीनों मंजिलों पर न कोई वॉटर कूलर है और न ही पीने के पानी की अन्य व्यवस्था। यहां तक कि हाथ धोने के लिए लगाए गए सबमर्सिबल पंप भी लंबे समय से खराब हैं। सूखी टोटियां इस बदहाल व्यवस्था की गवाही दे रही हैं।
ठंडे पानी की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन लौटते हैं प्यासे
परिसर में काम के सिलसिले में आने वाले लोग जब प्यास बुझाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें 500 मीटर दूर कचहरी या 1 किलोमीटर दूर डीएम ऑफिस तक जाना पड़ता है, जहां किसी तरह ठंडा पानी नसीब होता है।
गौरतलब है कि पिछले साल जिला पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों ने चंदा इकट्ठा कर एक वाटर कूलर लगवाया था, जो कुछ महीनों तक चला, लेकिन अब वह भी गर्मी की तपिश नहीं झेल सका और छह महीने से बंद पड़ा है।
विकास भवन की यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि जहां से जिले के विकास की योजनाएं संचालित होती हैं, वहां बुनियादी सुविधाओं का इतना अभाव क्यों है?
स्थानीय अधिकारियों ने अब तक पेयजल संकट को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की है, जबकि यह समस्या सीधे तौर पर रोज आने-जाने वाले हजारों लोगों को प्रभावित कर रही है।



