गोड्डा
राखी का पर्व: बहन के प्यार और भाई के वचन का अटूट संगम रक्षाबंधन।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा – रक्षाबंधन का अर्थ है रक्षाबंधन, अर्थात किसी को अपनी रक्षा के लिए बांध लेना। इसीलिए राखी बांधते समय बहन कहती है भैया! मैं तुम्हारी शरण में हूं, मेरी सब प्रकार से रक्षा करना।आज के दिन बहन अपने भाई के हाथ में राखी बांधती है और उन्हें मिठाई खिलाती है। भाई की कलाई पर बंधा राखी का धागा सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि बहन के अटूट विश्वास, स्नेह और दुआओं का जीता-जागता प्रतीक है। रक्षाबंधन का यह पर्व हर मुश्किल में साथ निभाने, रक्षा करने और रिश्तों की मिठास को जीवनभर बनाए रखने का पवित्र वचन है। सुबह से ही गोड्डा की गलियां भाई-बहन की हंसी और मिलन के रंग में रंगी नजर आईं। बाजारों में राखियों की रौनक और मिठाइयों की खुशबू ने त्योहार का माहौल और भी खास बना दिया। घर-घर में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की, तो भाइयों ने भी जीवनभर रक्षा का प्रण लिया। कहीं छोटे बच्चों की मासूम मुस्कान, तो कहीं बड़े-बुजुर्गों के भावुक आलिंगन – हर दृश्य ने रक्षाबंधन की असली खूबसूरती को बयां किया। नाजुक सा यह धागा भले साधारण लगे, लेकिन इसमें छुपा प्यार और भरोसा रिश्तों को उम्रभर मजबूत बनाए रखता है। आज गोड्डा में सिर्फ राखी का त्योहार नहीं, बल्कि रिश्तों की सबसे मीठी कहानी लिखी गई – भाई और बहन के उस बंधन की, जो समय के हर इम्तिहान में कायम रहता है। भाई की कलाई पर बंधा राखी का धागा सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि बहन के अटूट विश्वास, स्नेह और दुआओं का जीता-जागता प्रतीक है। रक्षाबंधन का यह पर्व हर मुश्किल में साथ निभाने, रक्षा करने और रिश्तों की मिठास को जीवनभर बनाए रखने का पवित्र वचन है। घर-घर में बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की, तो भाइयों ने भी जीवनभर रक्षा का प्रण लिया।



