लखनऊ के पारा क्षेत्र में एसटीएफ और पुलिस की बड़ी कार्रवाई,
प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की भारी खेप बरामद
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लखनऊ : उत्तर प्रदेश विशेष कार्यबल (एसटीएफ) और पारा पुलिस ने शुक्रवार रात पारा क्षेत्र में एक संयुक्त छापेमारी के दौरान प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की बड़ी खेप बरामद की है। इस कार्रवाई में कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है, और उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह रैकेट अवैध रूप से ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के निर्माण और तस्करी में शामिल था, जिसका उपयोग दूध उत्पादन बढ़ाने और सब्जियों की वृद्धि तेज करने के लिए किया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।
आधिकारिक बयान: उत्तर प्रदेश एसटीएफ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अमित कुमार नागर ने बताया, “हमें विश्वसनीय सूचना मिली थी कि पारा क्षेत्र में एक अवैध फैक्ट्री में प्रतिबंधित ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का निर्माण और वितरण किया जा रहा है। इसके आधार पर पारा पुलिस के साथ मिलकर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया गया। छापेमारी में भारी मात्रा में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन, खाली शीशियां, पैकेजिंग सामग्री और अन्य उपकरण बरामद किए गए हैं।”उन्होंने आगे कहा, “हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है, और हमें संदेह है कि इस रैकेट के तार बिहार और अन्य राज्यों से जुड़े हो सकते हैं। बरामद इंजेक्शनों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं ताकि उनकी शुद्धता और मिलावट की पुष्टि की जा सके।”
यह कार्रवाई उस समय हुई है जब हाल ही में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में अवैध ऑक्सीटोसिन तस्करी के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। इससे पहले, जुलाई 2025 में काकोरी क्षेत्र में एसटीएफ और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की टीम ने 5,87,880 मिलीलीटर ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन बरामद किए थे, जिनकी बाजार कीमत लगभग 1.20 करोड़ रुपये थी। उस ऑपरेशन में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, और जांच में पता चला था कि इंजेक्शनों में फिनाइल और सिरके की मिलावट थी, जो पशुओं और मनुष्यों के लिए खतरनाक है। कानूनी कार्रवाई:एसटीएफ के अनुसार, इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (धोखाधड़ी), 280 (स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वातावरण बनाना), 276 (दवाओं में मिलावट), और 112 (छोटे स्तर का संगठित अपराध) के तहत पारा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। बरामद सामग्री और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के आधार पर आगे की जांच जारी है।
स्वास्थ्य जोखिम और सामाजिक प्रभाव:ऑक्सीटोसिन का अवैध उपयोग, विशेष रूप से दूध उत्पादन और सब्जियों की वृद्धि में, गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी इंजेक्शनों का उपयोग पशुओं में हार्मोनल असंतुलन और मनुष्यों में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। एसटीएफ ने इस तरह के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई है।
एसटीएफ और पारा पुलिस इस रैकेट के पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए बिहार और अन्य संभावित आपूर्ति स्थानों पर जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं। जनता से अपील की गई है कि वे ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।



