
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा/बसंतराय : विकास की अनदेखी से त्रस्त बसंतराय प्रखंड के कैथिया पंचायत का कैथिया गांव आखिरकार अपनी बदहाली से उबरने के लिए खुद ही मैदान में उतर आया। वर्षों से कीचड़ में जी रहे ग्रामीणों ने अब नेताओं और सरकार के वादों पर भरोसा छोड़कर स्व-सहायता से गांव की सफाई की शुरुआत कर दी। कैथिया गांव, जो नाले की सुविधा से वंचित होने के कारण नाला विहीन गांव के नाम से जाना जाता था। पिछले 30 वर्षों से गंदगी और कीचड़ की समस्या से जूझ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि चुनाव के समय हर दल के नेता बड़े-बड़े वादे करके आते हैं, लेकिन चुनाव बीतते ही वे वादे हवा हो जाते हैं और गांव की दशा जस की तस बनी रहती है। गांव के मोहम्मद बबलू, जमशेद, अरशद, इनामुल, शाहिद, पूर्व मुखिया समीम, इकराम, जावेद, जहांगीर, इस्लाम, मुस्लिम समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन दशकों से वे कीचड़ और गंदगी में जीने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों ने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में गांव में पीसीसी रोड का निर्माण हुआ था। उस समय उन्हें कुछ दिन कीचड़ से राहत मिली, लेकिन सड़क के दोनों ओर नाला नहीं बनाए जाने के कारण कुछ ही समय बाद सड़क फिर से कीचड़ में दब गई और समस्या पहले जैसी बनी रही। सरकार और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से तंग आकर ग्रामीणों ने गांव की बैठक बुलाई। बैठक में निर्णय लिया गया कि अब किसी का इंतजार नहीं करेंगे। इसके बाद गांव के युवाओं ने पहल की और हर घर से चावल-गेहूं बेचकर 200-200 रुपये इकट्ठा किए। जुटाई गई राशि से ग्रामीणों ने जेसीबी मशीन मंगवाई और गांव के मुख्य मार्ग के दोनों ओर नाले की खुदाई करवाई। साथ ही सड़क पर जमा कीचड़ को ट्रैक्टर की मदद से हटाया गया। जैसे ही कैथिया के ग्रामीणों की यह पहल सोशल मीडिया पर फैली, कई पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधि भी गांव पहुंचे और सहयोग देने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों के इस स्व-सहायता अभियान की हर तरफ सराहना हो रही है। गांववासियों ने साफ कहा कि अगर इस पंचवर्षीय कार्यकाल में कैथिया गांव को कीचड़ और गंदगी से स्थायी मुक्ति नहीं मिली, तो आने वाले चुनाव में किसी भी दल के जनप्रतिनिधि को गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों की इस सामूहिक पहल ने साबित कर दिया कि जब लोग ठान लें तो संसाधनों के अभाव में भी बदलाव लाया जा सकता है।



