गाजियाबाद

लोनी क्षेत्र में लगातार घायल गौवंश मिलने से हड़कंप

गौरक्षकों ने फिर दिखाई संवेदनशीलता और तत्परता

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
लोनी गाजियाबाद : लोनी क्षेत्र में घायल अवस्था में गौवंश मिलने की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीते दिन ट्रोनिका सिटी और लालबाग पुलिस चौकी क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर गौवंश के घायल मिलने की सूचना पर गौरक्षकों और पुलिस टीम ने मौके पर पहुँचकर प्राथमिक उपचार कराया और गंभीर रूप से बीमार गौमाता को हरियाणा के झज्जर हॉस्पिटल तक पहुँचाया।
पहली घटना ट्रोनिका सिटी थाना क्षेत्र की है, जहाँ अखिल भारतीय गौ रक्षा अल्पसंख्यक महासंघ के जिला अध्यक्ष रजनीश चौधरी व व जिला उपाध्यक्ष परवेश चौधरी को सूचना मिली कि एक गौमाता गंभीर रूप से बीमार अवस्था में पड़ी हुई है। सूचना मिलते ही परवेज़ चौधरी तत्काल मौके पर पहुँचे और थाना ट्रोनिका सिटी के एसएचओ श्री सरबन कुमार गौतम को इसकी जानकारी दी।
सूचना मिलते ही उपनिरीक्षक पवन कुमार पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे। गौ रक्षा दल के चिकित्सक डॉ. मोहन आर्या ने घायल गौमाता की जांच की और बताया कि उसकी स्थिति अत्यंत नाज़ुक है। चूंकि लोनी और ग़ाज़ियाबाद क्षेत्र में गौ उपचार हेतु कोई हॉस्पिटल उपलब्ध नहीं है, इसलिए परवेज़ चौधरी और टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए झज्जर (हरियाणा) से एम्बुलेंस बुलवाई और बड़ी मशक्कत के बाद गौमाता को झज्जर स्थित गौ हॉस्पिटल भेजा गया।
इस सराहनीय कार्य में  इसराइल (राष्ट्रीय सचिव, एंटी क्राइम ऑल इंडिया ट्रस्ट) तथा अन्य गौरक्षक का योगदान रहा।
दूसरी घटना लालबाग पुलिस चौकी क्षेत्र की है, जहाँ लक्ष्मी गौरक्षक ट्रस्ट के अध्यक्ष आशू पहलवान को सूचना मिली कि एक छोटा गौवंश घायल अवस्था में घूम रहा है और उसके कान से लगातार खून बह रहा है। सूचना पर गौरक्षक दल के विशू पंवार, अक्षय, सोनू, रोहित, प्रिस, युवराज, दीपक, मोहित आदि सदस्य मौके पर पहुँचे और घायल गौवंश के सड़े हुए कान की सफाई कर उसका प्राथमिक उपचार किया।
लगातार क्षेत्र में घायल और बीमार गौवंश मिलने से स्थानीय नागरिकों में चिंता व्याप्त है। गौरक्षकों का कहना है कि नगर पालिका परिषद के संबंधित अधिकारी क्षेत्र में घूमते और घायल पशुओं की अनदेखी कर रहे हैं, जिसके चलते ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं।
गौरक्षकों ने प्रशासन से मांग की है कि लोनी क्षेत्र में तत्काल गौ हॉस्पिटल या उपचार केंद्र की स्थापना की जाए ताकि घायल गौवंश को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके।
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