बागपत

दीपावली के बाद बारूद की गंध से परेशान नन्हें फेफड़े

खांसी, जुकाम और सांस की तकलीफ से जूझ रहे बच्चे — डॉ. अभिनव तोमर ने दी अहम सलाह : “घबराएं नहीं, बस सावधानी बरतें”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बड़ौत (बागपत)। रोशनी के त्योहार दीपावली ने हर घर को जगमगा दिया, लेकिन अब उसी रोशनी की रात के बाद सुबह की हवा में बारूद और धुएं की गंध तैर रही है।
इस प्रदूषित हवा का सबसे ज़्यादा असर हमारे बच्चों के नन्हे फेफड़ों पर पड़ रहा है।
शहर के अस्पतालों और क्लीनिकों में बीते दो दिनों से खांसी, जुकाम और सांस की तकलीफ से जूझते छोटे बच्चों की संख्या तेजी से बढ़ी है।
खासकर जिन बच्चों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की शिकायत है, उनमें समस्या और गंभीर हो रही है।
 “घबराएं नहीं, सावधानी बरतें” — डॉ. अभिनव तोमर
डॉ. अभिनव तोमर (MBBS, MD, बाल रोग विशेषज्ञ), आस्था मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली–सहारनपुर हाईवे रोड, बड़ौत के अनुसार —
> “त्योहारों के दौरान जलाए गए पटाखों में भारी धातुएं और रासायनिक गैसें मिलकर हवा को ज़हरीला बना देती हैं।
बच्चों के फेफड़े अभी विकास की अवस्था में होते हैं, इसलिए वे इस प्रदूषण के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।”
वे बताते हैं कि इन दिनों सबसे आम लक्षण हैं —
लगातार खांसी या गले में खराश,
नाक बहना या बंद होना,
आंखों में जलन,
और सांस लेने में तकलीफ।
डॉ. तोमर कहते हैं,
> “माता-पिता सबसे पहले घबराएं नहीं। थोड़ी सावधानी से बच्चों को इन समस्याओं से बचाया जा सकता है।”
 बच्चों की सेहत के लिए ये सावधानियां जरूरी हैं
1. सुबह के समय बच्चों को बाहर खेलने न भेजें। इस वक्त हवा में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक होता है।
2. कमरे में एयर-प्यूरीफायर या घर में तुलसी, एलोवेरा जैसे पौधे रखें, जो प्राकृतिक रूप से हवा को शुद्ध करते हैं।
3. बच्चों को हल्का गुनगुना पानी पिलाएं और ठंडी चीज़ों से परहेज कराएं।
4. अगर बच्चा लगातार खांस रहा है या सांस फूल रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
5. घर की खिड़कियां सुबह-सुबह खुली न छोड़ें, ताकि धुएं का असर अंदर न पहुंचे।
 जहां मिल रही है विशेषज्ञ सलाह
डॉ. अभिनव तोमर आस्था मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, 709-बी, दिल्ली-सहारनपुर हाईवे रोड, बड़ौत में मरीजों को देख रहे हैं।
इसके अलावा उनकी द्वितीय ओपीडी – आनंद नर्सरी, मूर्ति नर्सिंग होम, गांधी रोड, बड़ौत में भी परामर्श उपलब्ध है।
 एक संदेश समाज के नाम
डॉ. तोमर कहते हैं —
> “दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन अगर हमारी खुशियों से किसी बच्चे की सांसें भारी पड़ जाएं, तो वह रोशनी नहीं, अंधेरा है।
पटाखे जलाएं, मगर संयम के साथ।
बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देना ही सच्ची दीपावली की रोशनी है।”
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