बागपत

बच्चों की सर्दी में देखभाल कैसे करें — डॉ. अभिनव तोमर ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो l
बड़ौत/बागपत : बदलते मौसम के बीच बच्चों में बढ़ रही सर्दी, खांसी और जुकाम की समस्या को देखते हुए शहर के जाने-माने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिनव तोमर ने अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से बच्चों को मौसमी बीमारियों से काफी हद तक बचाया जा सकता है।
डॉ. तोमर ने पाँच प्रमुख बिंदुओं पर विशेष रूप से बात की—
 कपड़ों की लेयरिंग ज़रूरी
डॉ. तोमर के अनुसार बच्चों को एक मोटी परत के बजाय कई पतली परतों वाले गर्म कपड़े पहनाना अधिक लाभदायक है। इससे शरीर की गर्मी बनी रहती है और तापमान का नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। खासतौर पर सिर, कान और पैरों को ढककर रखना चाहिए, क्योंकि ठंड सबसे अधिक इन्हीं हिस्सों से लगती है।
 भोजन और पानी पर दें ध्यान
उन्होंने बताया कि सर्दी में पानी पीना बच्चे भूल जाते हैं, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में गुनगुना पानी, सूप व मौसमी फल उपयोगी हैं।
शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन-C युक्त खाद्य पदार्थ — जैसे नींबू, आंवला, संतरा, टमाटर — बच्चे को नियमित रूप से देने चाहिए।
 कमरा रहे हवादार और नमी से भरपूर
सर्दी में लोग कमरों को पूरी तरह बंद रखते हैं, लेकिन ताज़ी हवा और धूप का आना आवश्यक है।
डॉ. तोमर के अनुसार कमरे में यदि हीटर का उपयोग हो रहा है तो ह्यूमिडिटी बनाए रखने के लिए पानी से भरा कटोरा अवश्य रखें, ताकि बच्चे की नाक और गले में सूखापन न हो।
 खुद से दवा न दें, घरेलू उपाय सीमित रखें
उन्होंने अभिभावकों को चेताया कि बिना डॉक्टर सलाह एंटीबायोटिक देना नुकसानदेह है।
हल्के जुकाम में भाप, गुनगुना पानी और विश्राम से राहत मिलती है, लेकिन खुद से दवाइयाँ देने से बीमारी बढ़ सकती है या लंबे समय के नुकसान हो सकते हैं।
 इन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से मिलें
डॉ. तोमर ने बताया कि यदि बच्चे में सांस लेने में तकलीफ़, लगातार तेज़ बुखार, खाना-पानी न लेना, अधिक सुस्ती या होंठ-नाखून का नीला पड़ना जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे गंभीर मानते हुए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
अभिभावकों के लिए संदेश
डॉ. अभिनव तोमर ने कहा कि—
“सर्दी घबराने की चीज़ नहीं, समझदारी की चीज़ है। सावधानी, समय पर पहचान और सही कदम बच्चों को स्वस्थ रख सकते हैं।”
अभिभावकों से उन्होंने अपील की कि बच्चों को ठंड से बचाएँ, लेकिन अत्यधिक गर्म कपड़ों में न लपेटें। संतुलन ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
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