
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । सिंगरौली जिले की ग्राम पंचायत खनुआ नवा आज भी पक्की सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। आज़ादी के 76 वर्ष बाद यह स्थिति केवल शर्मनाक नहीं, बल्कि लोकतंत्र, विकास और सुशासन के दावों पर सीधा सवाल है।
ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण को लेकर सरपंच, सचिव और सहायक सचिव से अनगिनत बार शिकायत की गई, लेकिन हर बार सिर्फ झूठे आश्वासन और गोलमोल जवाब ही मिले। कभी कहा गया—“भाजपा के वरिष्ठ नेता ने काम रुकवा दिया”, तो कभी—“टेंडर हो गया है, अब सड़क बनेगी।”
हकीकत यह है कि सड़क सिर्फ फाइलों और कागजों में दौड़ रही है, जमीन पर नहीं।
प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तब सामने आई, जब हाल ही में एक महिला के ऑपरेशन के बाद सड़क और एंबुलेंस के अभाव में उसे चारपाई पर उठाकर घर ले जाना पड़ा। यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि सरकार और सिस्टम की निर्मम विफलता का जीवंत प्रमाण है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि गांव में सरकारी बंधा तो बना दिया गया, लेकिन उसके बगल में सड़क बनाना प्रशासन भूल गया। बरसात के दिनों में यही बंधा बच्चों के लिए मौत का रास्ता बन जाता है। बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं, माता-पिता हर दिन अनहोनी की आशंका में जीते हैं।
नतीजा—शिक्षा प्रभावित, भविष्य खतरे में।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है—
क्या विकास सिर्फ भाषणों, पोस्टरों और फाइलों तक सीमित है?
क्या ग्रामीणों को सड़क के लिए और कितनी पीड़ा झेलनी होगी?
अब यह मामला केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मानवाधिकार, शिक्षा के अधिकार और जीवन के अधिकार का खुला उल्लंघन बन चुका है।
ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल स्थल निरीक्षण हो दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और समयबद्ध सड़क निर्माण सुनिश्चित किया जाए अन्यथा खनुआ नवा की यह त्रासदी आने वाले समय में प्रशासन के लिए कलंक की कहानी बनकर इतिहास में दर्ज होगी।



