गाजियाबाद
लोनी नगर पालिका में सफाई व्यवस्था ध्वस्त
कर्मचारियों का ESI-PF करोड़ों रुपए बकाया, लोकायुक्त तक पहुंचा मामला

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। नगर पालिका परिषद लोनी की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। शहर के विभिन्न वार्डों में कूड़े के ढेर लगे हैं, नालियों की सफाई नियमित नहीं हो रही और समय पर वाहनों की कमी के चलते कूड़ा उठान न होने से नागरिकों में भारी नाराजगी है। कई इलाकों में बदबू और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन पालिका प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही।
वेतन और ESI-PF भुगतान में भारी गड़बड़ी
मामला तब और गंभीर हो गया जब सफाई कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनके वेतन से हर माह ईएसआई (ESI) और पीएफ (EPF) की कटौती तो की जा रही है, लेकिन संबंधित खातों में जमा नहीं की जा रही। कर्मचारियों का कहना है कि महीनों से उन्हें इन योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिला, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है।
ठेकेदार पर शोषण के आरोप
पालिका द्वारा नियुक्त अनुबंधित कार्यदायी संस्था पर कर्मचारियों के शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। सफाईकर्मियों का कहना है कि उन्हें न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिलती और श्रम कानूनों के तहत मिलने वाली सुविधाएं भी नहीं दी जा रहीं। कई कर्मचारियों को समय पर ईपीएफ नंबर तक जारी नहीं किए गए, जबकि पुराने ईएसआई-पीएफ बकाया की जानकारी भी नहीं दी जा रही।
करोड़ों के गबन की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, नगरपालिका परिषद लोनी में ईएसआई-पीएफ मद में करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि एक ही कंपनी पिछले चार वर्षों से सफाई का ठेका संभाल रही है। इस मामले में शिकायतों के बाद आनन-फानन में कुछ कर्मचारियों को ईपीएफ नंबर जारी किए गए, लेकिन पुराने बकाया भुगतान अब भी लंबित हैं।
इसी बीच सफाई कार्य के नाम पर नगरपालिका परिषद लोनी द्वारा करीब चार करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की भी चर्चा है, जिससे वित्तीय अनियमितताओं के आरोप और गहराते जा रहे हैं।
शिकायतों पर भी नहीं हुई कार्यवाही
कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने कई बार पालिका प्रशासन को लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई। मामला अब लोकायुक्त व प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच चुका है, फिर भी जांच की रफ्तार धीमी है। इससे अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
लोगों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत के कारण कार्यवाही अधर में लटकी हुई है।
विधायक की शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में
विधायक मदन भैया द्वारा विधानसभा में मुद्दा उठाए जाने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। प्रदेश के अनु सचिव ने जिलाधिकारी गाजियाबाद से रिपोर्ट तलब की । लेकिन नगर पालिका और संबंधित कंपनी अब तक स्पष्ट जवाब देने में असफल रही है।
दलित व कमजोर वर्ग के कर्मचारी सबसे ज्यादा प्रभावित
सफाई कार्य में लगे अधिकांश कर्मचारी दलित और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से हैं। उनका कहना है कि उनकी मेहनत की कमाई हड़प ली गई है, जिससे उनके परिवारों पर आर्थिक संकट गहरा गया है।
नागरिकों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
शहरवासियों का कहना है कि गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और कर्मचारियों का बकाया भुगतान कराने की मांग की है।
यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और धरना प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
बड़ा सवाल
अब सवाल यह है कि क्या सरकार दोषी कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर गबन पर मुकदमा दर्ज करेगी या जांच के नाम पर मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा? पीड़ित कर्मचारियों और नगरवासियों को न्याय कब मिलेगा, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।



