ललितपुर
चंचल नायक ने बुन्देलखण्ड की शौर्य गाथा को बुन्देली भाषा में किया प्रस्तुत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। अखिल भारतीय विधार्थी परिषद से नेमवि इकाई अध्यक्ष चंचल नायक ने अभाविप कानपुर प्रांत द्वारा वीर अभई के नगर उरई में आयोजित हो रहे 65 वे प्रांत अधिवेशन मे बुंदेलखंड की शौर्य गाथा को बुंदेली भाषा मे प्रस्तुत किया। चंचल नायक ने मंच पर बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति दी। बुंदेलखंड की धरती पर जन्मी चंचल नायक ने अपनी अंतिम कविता मे चंचल जी ने कहा है सबसे पहले आज़ादी का हमने विगुल बजाया था, रानी झांसी के चरणों में गोरों ने शीश झुकाया था। आल्हा- ऊदल की गाथा सुन तलवारें नाचने लगती हैं, मर्दन सिंह, राजा खेत सिंह की कथा बचाने लगती हैं। बुंदेल केसरी छत्रसाल से मौत स्वयं घबराती है, बुंदेलखंड की माटी दुनिया भर में पूजी जाती है। हम तूफ़ानों से लड़ते हैं, हम जुगनू के रखवाले हैं, हम मधुकर साह बुंदेला का विद्रोह जगाने वाले हैं। हरदौल लल्ला, आल्हा- ऊदल, लक्ष्मीबाई मर्दानी को सौ-सौ बार नमन मेरा, बुंदेलखंड के पानी उठो बुंदेलखंड के शेरा जागो मां ने तुम्हे बुलाया है कहो गर्व से हम बुंदेलखंडी और बुंदेलखंड हमारा है।



