बागपत

जैन ज्योतिष एवं वास्तु संगोष्ठी का भव्य आयोजन,

आचार्य श्री नयन सागर जी महाराज का पावन सानिध्य

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बड़ौत/बागपत : दिगंबर जैन समाज समिति बड़ौत के तत्वावधान में श्री दिगंबर जैन अतिथि भवन बड़ौत में जैन ज्योतिष एवं वास्तु विषयक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन जागृतिकारी संत आचार्य श्री 108 नयन सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में देशभर से पधारे 20 से अधिक जैन विद्वानों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। संगोष्ठी का विषय था – “ज्योतिष के अनुसार कब होगा आपका भाग्योदय”

मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात जैन ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद रवि जैन गुरुजी दिल्ली (आदिनाथ चैनल फेम, सम्मानित – दुबई, अबूधाबी, नेपाल) ने विषय पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने ज्योतिष और वास्तु के माध्यम से जीवन में आने वाली समस्याओं के समाधान पर प्रकाश डाला। साथ ही, जनसमूह की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया।

इस अवसर पर आचार्य श्री नयन सागर जी महाराज ने संबोधित करते हुए कहा कि जैन ज्योतिष अनादिकाल से हमारे शास्त्रों में वर्णित है और तीर्थंकरों ने इसके माध्यम से जीवन के विविध आयामों को समझने की दृष्टि दी है। उन्होंने अखिल भारतीय जैन ज्योतिष आचार्य परिषद द्वारा चलाए जा रहे अभियान की सराहना करते हुए समाज से इस मुहिम में सहभागी बनने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में परिषद के संरक्षक प्रो. डॉ. टीकम चंद जैन (दिल्ली) ने परिषद की पिछले 5 वर्षों की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रवि जैन गुरुजी की अध्यक्षता में परिषद में 200 से अधिक विद्वान सदस्य हैं जो जैन आगम और ज्योतिष के प्रचार-प्रसार में जुटे हैं।

गोष्ठी में प्रमुख रूप से उपस्थित रहे:
राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अरविन्द जैन शास्त्री (रोहिणी),
पं. अशोक जैन शास्त्री ‘धीरज’ (दिल्ली),
डॉ. सुरभि जैन (बड़ौत),
पं. धीरज जैन (बड़ौत),
पं. अशोक जैन गोयल (दिल्ली),
 मुकेश जैन (मोदीनगर),
जय कुमार जैन (जयपुर)

इसके अतिरिक्त डॉ. सुमेर चंद जैन, विनोद जैन, सुशील जैन, शिवानी जैन ( दिल्ली),
पं. लक्ष्मी चंद जैन (मुरादाबाद) भी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का मंगलाचरण पं. प्रदीप जैन (दिल्ली) ने किया जबकि शानदार मंच संचालन डी. के. जैन (दिल्ली) द्वारा किया गया।

समापन अवसर पर समिति के प्रधान प्रवीण जैनमहामंत्री मनोज जैन व समस्त कार्यकारिणी पदाधिकारियों ने सभी विद्वानों का तिलक, माला, शॉल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। साथ ही, भविष्य में आचार्य श्री नयन सागर जी महाराज के सानिध्य में और भी बड़े स्तर पर आयोजन किए जाने की घोषणा की गई।

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