गोड्डा
31 तारिक को 31 वर्षो तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त
राजबिठा उत्क्रमित मध्य विद्यालय, देवीपुर, बोआरीजोर, गोड्डा

नेशनल प्रेस टाइम्स, व्यूरो
शिक्षक रामचन्द्र पंडित के सम्मान में विदाई समारोह का आयोजन
गोड्डा : जिला के बोआरीजोर प्रखंड अंतर्गत राजबिठा उत्क्रमित मध्य विद्यालय, देवीपुर में आज दिनांक 31 अगस्त 2025 को शिक्षक रामचन्द्र पंडित के सेवानिवृत्ति के अवसर पर एक सहसम्मान विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर समारोह को यादगार बनाया।रामचन्द्र पंडित ने शिक्षा के क्षेत्र में 31 वर्षों तक अपनी निष्ठापूर्ण सेवाएं दीं। मूल रूप से गोड्डा प्रखंड के अमरपुर गांव के निवासी रामचन्द्र पंडित ने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया। मात्र आठ वर्ष की उम्र में अपने पिता केशो पंडित को खो देने के बाद, मां के कंधों पर पांच बहनों और एक भाई की जिम्मेदारी आ गई। गरीबी और संघर्षों के बीच उन्होंने गांव के स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की, फिर जमनी उच्च विद्यालय से मैट्रिक पास किया और गोड्डा कॉलेज से आगे की पढ़ाई पूरी की। संयोगवश, जिस विद्यालय में उन्होंने पढ़ाई की, वहां उन्हें पढ़ाने का अवसर भी प्राप्त हुआ।रामचन्द्र पंडित का मानना था कि सरकार ने उन्हें पढ़ाने के लिए नियुक्त किया है, इसलिए गरीब और जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को शिक्षित करना उनका प्राथमिक कर्तव्य है। इस सिद्धांत पर चलते हुए उन्होंने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी और अन्य कार्यों को गौण रखा। उनके दोनों पुत्र, नवनीत और रोहित, इंजीनियर हैं, जो उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।इस विदाई समारोह में विद्यालय परिवार के गिरीश महतो, बोनीफास बास्की, सुभाष मुर्मू, सुनील हांसदा, प्रियतम कुमार, शत्रुघ्न पासवान, छात्र-छात्राओं के साथ-साथ झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य महासचिव चक्रधर यादव, देवनंदन साह, शिव प्रसाद भगत, जयकांत यादव, दीपनारायण यादव, रेमपड मुर्मू, बिनोद गुप्ता, शिक्षक फैज, शिवप्रसाद, जतन कुमारी, विनोद चंपा मुर्मू, सुशील हेम्ब्रम, सरिता मुर्मू, गोविंद टुडू सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।देवीपुर का यह विद्यालय एक आदर्श विद्यालय के रूप में जाना जाता है, और रामचन्द्र पंडित जैसे शिक्षकों के योगदान ने इसे इस मुकाम तक पहुंचाया है। यह समारोह उनके शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज के लिए किए गए कार्यों का सम्मान करने का एक प्रयास था।




