नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद । लोनी तहसील के मीरपुर हिन्दू गांव में प्रस्तावित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव लगातार गहराता जा रहा है। करीब दो महीनों से चल रहे किसानों के आंदोलन ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब तीन दिन पहले पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किए जाने की घटना सामने आई।
जानकारी के अनुसार, मीरपुर हिन्दू गांव में लगभग 120 बीघा जमीन पर प्रतिदिन करीब 2000 टन कचरे के निस्तारण की क्षमता वाला प्लांट स्थापित किया जा रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि प्लांट शुरू होने के बाद इलाके में दुर्गंध, प्रदूषण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना है कि उक्त भूमि पर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या अन्य जनोपयोगी संस्थान विकसित किए जाने चाहिए थे, न कि कूड़ा प्रबंधन केंद्र।
ग्रामीणों के मुताबिक, इस परियोजना का विरोध वर्ष 2012 से ही किया जा रहा है। प्रारंभ में गांववासियों को डिग्री कॉलेज और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि विकास के नाम पर गांव को कचरा केंद्र में बदला जा रहा है। किसानों का आरोप है कि नगर अधिकारियों के साथ बैठक में निर्माण कार्य रोकने का भरोसा दिया गया था, बावजूद इसके पीछे के रास्ते से काम जारी रखा गया।
गांव के लोगों का कहना है कि आबादी के बीच कूड़ा निस्तारण संयंत्र स्थापित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उनका आरोप है कि शांतिपूर्ण धरने पर बैठे सैकड़ों महिला-पुरुष किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया। हालांकि, देर रात औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अधिकांश को रिहा कर दिया गया।
विधायक पर किसानों के आरोप
किसान प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कुछ दिन पहले कई गांवों के किसान गनौली स्थित विधायक आवास पहुंचे थे, जहां विधायक ने कथित तौर पर उन्हें समर्थन देने और आंदोलन जारी रखने का आश्वासन दिया था। किसानों का आरोप है कि इसके बाद धरनारत ग्रामीणों पर पुलिस कार्रवाई क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के इशारे पर की गयी
आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन
लाठीचार्ज की घटना के बाद बसपा नेता सचिन शर्मा और मनोज जाटव अपने समर्थकों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। नेताओं ने पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए इसे किसानों की आवाज दबाने का प्रयास बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
फिलहाल मामला बेहद संवेदनशील स्थिति में पहुंच गया है। प्रशासन इसे शहर की आवश्यकता बता रहा है, जबकि ग्रामीण स्वास्थ्य और पर्यावरणीय जोखिमों का हवाला देते हुए परियोजना का विरोध कर रहे हैं। अब सबकी नजरें प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और किसानों की आगामी रणनीति पर टिकी हैं।


