
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
उझारी। शोहदा ए कर्बला के सोयम के मौके पर शब बेदारी का आयोजन किया गया। जिसमें बाहर से तशरीफ लाईं आधा दर्जन अंजुमनों ने नोहाख्वानी और सीनाज़नी की।
कस्बा उझारी के मोहल्ला सादात स्थित इमामबारगाहे अबू तालिब में मजलिस का आयोजन किया गया। जिसमें मर्सियाख्वानी शाहपुर सिरपुड़ा से तशरीफ लाए फूल मियां और उनके साथियों ने की। पेश ख्वानी के फराईज़ मारूफ सिरसवी, वासिफ बाकरी, जॉन बाकरी ने अदा किए। मजलिस को खिताब फरमाते हुए मौलाना कामरान हैदर ने कहा कि कर्बला हर इंसान को इज्जत के साथ जीने का सबक देती है। जालिम चाहे कितना भी ताकतवर क्यों न हो, एक अच्छा इंसान जालिम के जुल्म को बर्दाश्त नहीं कर सकता। मजलिस के बाद नोहाख्वानी और सीनाज़नी का दौर प्रारंभ हुआ। जिसमें सर्वप्रथम अंजुमन तंजीमे हुसैनी के साहिब ए बयाज अकबर मेहंदी और मौ० ज़ामिन ने नौहा पढ़ा। उसके बाद अंजुमने लश्करे हुसैनी मेरठ के साहिबे बयाज़ हुमायूं और ग़ीज़ाल रज़ा ने, अंजुमने अकबरी कुंदरकी सादात के साहिबे ब्याज़ रज़ा हसनैन काज़मी ने, अंजुमने यादगारें हुसैनी सेंथल के साहिबे बयाज़ वाहिद अली ने, अंजुमने अब्बासिया टिक्सा ज़िला मुज़फ्फरनगर के साहिबे बयाज़ शबीह हैदर ने, अंजुमने हैदरी साकनी के साहिबे बयाज़ चांद फ़ैज़ी ने नौहाख्वानी की तथा अन्जुमनों ने सीनाज़नी की। उसके बाद मेहंदी का जुलूस हुसैनी चौक, चांदनी चौक, भाटों वाला कुआं, मैन बाजार, मदरसा चौक, मोहल्ला देसलान, मौहल्ला कुम्हारान, गोल इमामबाड़ा, हुसैनी चौक होता हुआ इमामबारगाहे बाबुल हवाइज में जाकर समाप्त हुआ। इस अवसर पर मुख्य रूप से अफाक बाक़री, जामिन बाक़री, मौ अख्तर, मौ बाकिर, शाने अब्बास, अखलाक हुसैन, बिलाल बाक़री, शाने असगर, जीशान हैदर, मौ० अब्बास, सलमान हैदर, इब्ने अब्बास, आरिफ राजे, डा० राशिद अब्बास, सुल्तान मुस्तफा उर्फ टोनी मियां, हसन मेंहदी, गुल मौ०, वसीम कुरैशी, चांद वारसी, तंज़ीम अब्बास, अन्सारुल हक़, रहीमुददीन साबरी, मैराज अली, अलाउद्दीन सैफी, हाफिज अनवर अरमान बाकरी आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। प्रोग्राम का संचालन मौलाना आसिफ रजा बाक़री ने किया।



