
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
कालपी (जालौन)। एक ओर जहां विद्युत विभाग ने बिलिंग और आपूर्ति व्यवस्था को स्मार्ट बनाते हुए आधुनिक तकनीकों को अपनाया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। क्षेत्र के बिजलीघरों की हालत चिंताजनक बनी हुई है। यहां स्थापित ट्रांसफॉर्मरों में पर्याप्त मात्रा में तेल न होने के कारण उनके गर्म होकर कभी भी खराब होने की आशंका बढ़ गई है।
विगत वर्षों में विभाग द्वारा कई बड़े बदलाव किए गए। पहले इलेक्ट्रॉनिक मीटरों के माध्यम से रीडिंग लेकर उपभोक्ताओं को घर-घर बिल पहुंचाया जाता था और ऑनलाइन भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध थी। बावजूद इसके बकाया वसूली में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसी समस्या के समाधान हेतु विभाग ने स्मार्ट मीटर लागू किए, जिससे अब बैलेंस समाप्त होते ही बिजली आपूर्ति स्वतः बंद हो जाती है और अग्रिम भुगतान करने पर ही बहाल होती है। यह व्यवस्था 13 मार्च से लागू की गई है, जिससे वसूली की जिम्मेदारी भी काफी हद तक कम हो गई है। लेकिन इन तकनीकी सुधारों के बावजूद बिजलीघरों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा। उपखंड अधिकारी धर्मेन्द्र सिंह सचान के अनुसार उसरगांव बिजलीघर में एक 5 एमवीए और एक 10 एमवीए का ट्रांसफॉर्मर स्थापित है, जिनमें तेल की भारी कमी है। यही हाल न्यामतपुर और महेवा बिजली घरों का भी है, जहां ट्रांसफॉर्मरों में पर्याप्त तेल न होने से वे लगातार गर्म हो रहे हैं। यदि जल्द ही इन ट्रांसफॉर्मरों में तेल की पूर्ति नहीं की गई तो उनके खराब होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। एसडीओ के अनुसार इस गंभीर समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है, लेकिन अब तक तेल आपूर्ति की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विभाग स्मार्ट व्यवस्था लागू करने में आगे है, तो बुनियादी रखरखाव की अनदेखी क्यों की जा रही है। अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ सकता है।



