गंगा भारत के हृदय रची-बसी संस्कृति है: अनिल कुमार गांधी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय में गंगा पुस्तक परिक्रमा कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन भाषा विभाग, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय, ललित कला संकाय और राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार द्वारा किया गया। कार्यक्रम में गंगा के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, वैज्ञानिक और साहित्यिक पक्षों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ सत्यजीत रे प्रेक्षागृह में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें विख्यात इतिहासकार अनिल कुमार गांधी, लेखक डॉ. रामगोपाल भारतीय, कुलपति मेजर जनरल डॉ. जी.के. थपलियाल, प्रतिकुलपति कर्नल देवेंद्र स्वरूप, डीन डॉ. सुधीर त्यागी, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राहुल बंसल, भाषा विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा और डॉ. पिंटू मिश्रा सहित अनेक विद्वानों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर गंगा: भारतीय संस्कृति में महत्व विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, साथ ही चित्र प्रदर्शनी, पुस्तक प्रदर्शनी और वैन लाइब्रेरी के माध्यम से प्रतिभागियों को गंगा से संबंधित साहित्य और चित्रों से परिचित कराया गया।
इतिहासकार अनिल कुमार गांधी ने कहा, “गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत के हृदय में रची-बसी संस्कृति है। जहां गंगा बहती है, वह स्थान तीर्थ बन जाता है।” उन्होंने गंगा के अस्तित्व, ऐतिहासिक प्रसंगों और पुस्तक की भूमिका पर विचार रखते हुए कहा कि “किसी पुस्तक की आत्मा उसके विचार होते हैं, जो रचनात्मकता, प्रमाणिकता और तथ्यों के साथ पाठक से संवाद करते हैं।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गंगा जल में रोगाणु-नाशक गुण मौजूद हैं।
प्रख्यात लेखक डॉ. रामगोपाल भारतीय ने गंगा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गंगा भारतीय मानस की आत्मा है। वहीं, डॉ. राहुल बंसल ने गंगा के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया।
गंगा पुस्तक परिक्रमा के परियोजना प्रभारी कुलदीप ने बताया कि यह अभियान गंगा संरक्षण एवं जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के पदाधिकारियों व अन्य अतिथियों को सुभारती परिवार की ओर से स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन छात्रा विधि गोस्वामी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सीमा शर्मा द्वारा किया गया। वंदे मातरम् गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।


