गोड्डा

बिल्हा विषहरी पूजा लोकपर्व और आस्था का संगम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। जिले के विभिन्न गांवों में भादो माह के अवसर पर मनाया जाने वाला बिल्हा विषहरी पूजा आदिवासी और स्थानीय ग्रामीण संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।गोड्डा प्रखंड के घाट मंजवारा पंचायत के नयाडीह गांव में इस वर्ष भी मंगलवार को बिल्हा विषहरी पूजा पूरे उत्साह से मनाई गई। यह पूजा विशेष रूप से सर्पदंश से मुक्ति, परिवार की सुख-समृद्धि और गांव में शांति की कामना के लिए की जाती है।पूजा की परंपरा और मान्यता इसे मुख्य रूप से संताल, आदिवासी और ग्रामीण समुदाय द्वारा आयोजित किया जाता है।मान्यता है कि भादो महीने में विषधर सर्प सक्रिय रहते हैं, ऐसे में विषहरी देवी की पूजा कर उनसे रक्षा की प्रार्थना की जाती है। इस अवसर पर गांव के लोग मिलकर मिट्टी और बांस से प्रतिमा बनाते हैं, जिसमें विषहरी देवी के साथ अन्य लोक-देवताओं की मूर्तियां भी शामिल रहती हैं।
पूजा की विशेषताएं :
कलश स्थापना और विसर्जन पूजा के दिन कलश स्थापित किया जाता है और विसर्जन के समय ढोल-नगाड़े और नृत्य-गीतों के बीच भक्त उत्साह से झूमते हैं। सामूहिक आयोजन यह पूजा व्यक्तिगत न होकर पूरे गांव का सामूहिक पर्व होता है। हर घर से लोग इसमें भाग लेते हैं। लोकगीत और नृत्य पूजा के दौरान सांताल लोकगीत, झूमर और ढोल नगाड़े की गूंज गांव में माहौल को भक्ति और उमंग से भर देती है। बलिदान की परंपरा, कुछ जगहों पर पशु बलि की परंपरा भी जुड़ी होती है, हालांकि अब कई स्थानों पर यह प्रतीकात्मक रूप में ही किया जाता है। यह पूजा गांव के बीच एकता और भाईचारे का प्रतीक है। ग्रामीण मानते हैं कि इस पूजा से गांव में बीमारी, सर्पदंश और आपदाओं से बचाव होता है।साथ ही यह अवसर पीढ़ियों से चली आ रही संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम भी है। कलश विसर्जन के समय श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की थाप और गीतों पर थिरक उठे। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से इसी तरह इस आयोजन को करते आ रहे हैं। आयोजन समिति के घोलटन मांझी ने बताया कि यह पूजा गांव की परंपरा और आस्था का सबसे बड़ा पर्व है, जिसमें हर वर्ग के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
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