असम

बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य प्रमोद बोरों पर संपत्ति विवरण छुपाने का आरोप, चुनाव आयोग में शिकायत। 

प्रमोद बोरों की नामांकन रद्द करने की मांग, पत्नी के नाम करोड़ों की संपत्ति छुपाने का खुलासा।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

असम: आगामी बीटीएडी चुनाव की पृष्ठभूमि में संपत्ति विवरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य प्रमोद बोरों ने चुनावी शपथपत्र में संपत्ति की जानकारी छुपाई है, जिसके चलते वह गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। पत्नी पारुल भराली बोरों के नाम पर 9 स्थानों पर पाई गई भूमि संपत्ति ने बीटीआर की राजनीति में भूचाल ला दिया है। चुनावी शपथपत्र में इन संपत्तियों की जानकारी छुपाने को लेकर जन आंदोलन के प्रमुख अखिल गोगोई ने जनप्रतिनिधि कानून, 1951 के तहत प्रमोद बड़ा का नामांकन पत्र रद्द करने की मांग उठाई है। गौरतलब है कि प्रमोद बोरों द्वारा चुनावी शपथपत्र में पत्नी के नाम पर भूमि संपत्ति का विवरण न देने की सनसनीखेज जानकारी हाल ही में सामने आई है। नियम के अनुसार प्रत्याशी को शपथपत्र में अपनी तथा अपने परिवार की स्थावर और जंगम संपत्ति का विवरण देना अनिवार्य होता है। लेकिन प्राप्त सूचना के अनुसार, इस बार 28 नंबर गोयबाड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे बीटीसी के मुख्य कार्यकारी सदस्य प्रमोद बोरों ने पत्नी के नाम पर मौजूद कई संपत्तियाँ छुपाई हैं।
प्रमोद बोरों ने अपने शपथपत्र में पत्नी पारुल भराली बड़ा के नाम पर कुल 3 बीघा 10 लेचा कृषि भूमि का विवरण दिया है। ये सभी जमीनें रंगिया राजस्व सर्कल के अंतर्गत कसारी शोलमारी गाँव में स्थित हैं। शपथपत्र में दी गई जानकारी निम्नानुसार है—
(क) दाग नं. 227/242, पट्टा नं. 202
(ख) दाग नं. 227, पट्टा नं. 202
(ग) दाग नं. 391, पट्टा नं. 167
(घ) दाग नं. 390, पट्टा नं. 202
(ङ) दाग नं. 227, पट्टा नं. 202
(च) दाग नं. 390, पट्टा नं. 202
(छ) दाग नं. 318, पट्टा नं. 1059

ये कुल 3 बीघा 10 लेचा भूमि की जानकारी है।

लेकिन उसी राजस्व सर्कल और उसी गाँव कसारी शोलमारी में प्रमोद बड़ा के परिवार के नाम पर कई अन्य संपत्तियाँ भी मौजूद हैं, जो शपथपत्र में नहीं दर्शाई गईं। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, पत्नी पारुल भराली बोरों के नाम पर रंगिया राजस्व सर्कल में कम से कम 9 और स्थानों पर संपत्ति दर्ज है, जिनका उल्लेख शपथपत्र में नहीं किया गया। उनका विवरण इस प्रकार है—

(क) साहन गाँव, पट्टा नं. 56, दाग नं. 504 – 1 कठा 8 लेचा
(ख) दाग नं. 499 – 13 लेचा
(ग) दाग नं. 500 – 13 लेचा
(घ) दाग नं. 501 – 13 लेचा
(ङ) दाग नं. 504 – 14 लेचा
(च) दाग नं. 504 पर ही – 1 कठा 9 लेचा
(छ) कसारी शोलमारी गाँव, पट्टा नं. 339, दाग नं. 1085 – 3 कठा प्रथम श्रेणी बाड़ी भूमि
(ज) कसारी शोलमारी, पट्टा नं. 60, दाग नं. 450 – 3 कठा 6 लेचा
(झ) कसारी शोलमारी गाँव, पट्टा नं. 90, दाग नं. 228 – 4 कठा भूमि।

ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि प्रमोद बड़ा ने अपने शपथपत्र में साहन गाँव का बिल्कुल जिक्र नहीं किया। जबकि असम सरकार के राजस्व विभाग की आधिकारिक सूचना के अनुसार, वहाँ पारुल भराली समेत डॉ. हितेंद्र कलिता, दिगंत डेका, अलिंदा शर्मा, अनुपम शर्मा और दीपक कुमार बजाज के नाम पर जमीन दर्ज है। ये भूमि 1 दिसंबर 2023 और 22 जनवरी 2024 को खरीदी गई है। इसी प्रकार कसारी शोलमारी गाँव में पारुल भराली के नाम पर 2 बीघा 6 लेचा भूमि का विवरण भी छुपाया गया है।

यह जनप्रतिनिधि कानून, 1951 का गंभीर उल्लंघन है।

प्रमोद बोरों की इस कथित जालसाजी को लेकर असम के राजनीतिक दल ‘राईजर दल’ के अध्यक्ष अखिल गोगोई ने चुनाव आयोग का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज कर प्रमोद बोरों का नामांकन खारिज करने की मांग की है। अखिल गोगोई ने कहा कि प्रमोद बोरों ने न केवल अपनी काली और गुप्त संपत्ति का विवरण छुपाया, बल्कि बीटीआर के लोगों के साथ भी घोर धोखा किया है।

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