गोड्डा
गोड्डा सदर अस्पताल का ब्लड बैंक बना शोभा का बस्तु
रक्त की कमी से जूझ रहा है रक्त अधिकोष केंद्र

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग नहीं दे रही है ध्यान
जिले के स्वंय सेवी संस्थाएं भी इस मामले में है मौन
एक सप्ताह से किसी भी ब्लड ग्रुप का खून नहीं है उपलब्ध
ब्लड की कमी से जूझ रहे मरीज को हो रही दिक्कत : मनोज
गोड्डा। जिले का सदर अस्पताल। इसी अस्पताल परिसर में एक रक्त अधिाकोष केंद्र भी है। बहुत ही खर्च कर इस ब्लड बैंक का निर्माण कराया गया था। सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में करीब एक सप्ताह से दो बूंद रक्त उपलब्ध नहीं है। एक यूनिट की बात तो दूर की बात है। जिले में दो-दो मंत्री हवा हवाई हो रहे हैं। जिन्हें इन संवेदनशील मामलों से कोई सरकार नहीं रह गया है। इतना तो छोड़िए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग भी कोई रुचि नहीं ले रहा है। वहीं जिले में कई ऐसी स्वयं सभी संस्थाएं हैं, जो अपनी पीठ थपथपा कर मानव सेवा का ढोल पिटती है। वैसे एनजीओ भी ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध कराने के दिशा में कोई शिविर नहीं लग रहे हैं। इस वजह से ब्लड बैंक शोभा का वस्तु बन कर रह गया है। इतना ही नहीं हर रोज रक्त की कमी से जूझ रहे मरीज सदर अस्पताल में भर्ती कराए जाते हैं। ब्लड बैंक के कर्मियों द्वारा उनके सामने हाथ जोड़कर रक्त नहीं होने की जानकारी दी जाती है। कितना विवश हो चुका है सिस्टम। सिस्टम में बैठे लोगों को ना तो ब्लड बैंक के ब्लड उपलब्ध कराने को लेकर कोई लेना-देना रह गया है। केवल आधिकारिक के निर्देश पर पदाधिकारी सदर अस्पताल का हवा खाने पहुंच जाते हैं। पता चलता है कि पदाधिकारी द्वारा अधिकारी का हुक्म हो जाने के लिए अस्पताल का मुआयना किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ब्लड बैंक में करीब एक सप्ताह से किसी भी ब्लड ग्रुप का एक यूनिट तक रक्त उपलब्ध नहीं है। उल्लेखनीय है कि पिछले सभी सिविल सर्जन की ओर से ब्लड बैंक में रक्त की कमी होने पर अपने स्तर पर शहर के अग्रणी पंक्ति में खड़े लोगों और संस्था से पहल कर रक्तदार शिविर का आयोजन किया जाता रहा है। परंतु इन सिविल सर्जन के कार्यकाल में इसका अभाव देखा जा रहा है। दूसरी ओर झारखंड वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक मनोज कुमार कुशवाहा ने बताया कि सदर अस्पताल के रक्त अधिाकोष केंद्र में एक सप्ताह से ब्लड का उपलब्ध नहीं रहना एक तरफ से बड़ी लापरवाही है। कई ऐसी गर्भवती माता सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में भर्ती की जाती है, जिन्हे रक्त की अविलंब आवश्यकता पड़ती है। अब तो यहां दो बूंद रक्त नहीं है। दूरदराज एवं आदिवासी क्षेत्र से आने वाले मरीजों को डोनर भी नहीं मिल पाता है, वैसे में उन मरीजों की क्या स्थिति होगी या तो भगवान ही मालिक है। रक्त उपलब्ध कराने के लिए जिले के दो मंत्रियों के अलावा उपयुक्त और पुलिस अधीक्षक को विशेष तौर पर ध्यान देने की जरूरत है। इसके अलावा सीएस और डीएस को भी इस मामले में खास तौर पर पहल करने की आवश्यकता है। तब ही ब्लड बैंक में रक्त उपलब्ध हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जब रक्त अधिकोष केंद्र में ब्लड ही नहीं है तो यहां कर्मियों को ड्यूटी देकर किस तरह की औपचारिकता निभाई जा रही है। यहां पर एक सुरक्षाकर्मी की प्रतिनियुक्ति कर यहां ड्यूटी कर रहे टेक्नीशियन एवं स्वास्थ्य कर्मी को अस्पताल के किसी दूसरे जगह पर कार्य लेने की जरूरत है। प्रदेश संरक्षक श्री कुशवाहा ने सुबे के मुखिया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गोड्डा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक के मामले में आवश्यक संज्ञान लेने की मांग की है।




