सिंगरौली

सीआईएसएफ ने युद्ध-सक्षम

तकनीक दक्ष और भविष्य के लिए तैयार बल में तब्दील होने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में व्यापक बदलाव किए

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल इकाई वीएसटीपीपी विंध्यनगर के वरिष्ठ कमांडेंट  मनीष कुमार राय ने सभी जवानों को बताया कि (सीआईएसएफ) ने खुद को युद्ध-सक्षम, तकनीक दक्ष और भविष्य के लिए तैयार बल में तब्दील करने के लिए अपने प्रशिक्षण पाठ्यक्रम और मानकों में व्यापक बदलाव किए है। सीआईएसएफ के महानिदेशक श्री राजविंदर सिंह भट्टी, आईपीएस की अध्यक्षता में राष्ट्रीय औद्योगिक सुरक्षा अकादमी (निसा), हैदराबाद में आयोजित वार्षिक प्रशिक्षण सम्मेलन – 2025 के दौरान इन सुधारों को अंतिम रूप दिया गया।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में देश भर के वरिष्ठ अधिकारी एकत्रित हुए और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सीआईएसएफ की परिचालन तैयारियों को सर्वोच्च स्तर तक बढ़ाने के लिए एक साहसिक रोडमैप तैयार किया गया।
सीएपीएफ में सबसे कठिन युद्ध मानक
सबसे उल्लेखनीय सुधारों में से एक सभी रैंकों में “One Force, One Outdoor Standard नीति को अपनाना है। इसका अर्थ है कि अधिकारियों सहित सीआईएसएफ के सभी रैंकों को, उनके बुनियादी प्रशिक्षण से ही, अब एनएसजी जैसे विशिष्ट बलों द्वारा अपनाए जाने वाले कठोर शारीरिक और युद्ध मानकों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
इसी प्रकार, सभी 26 बाधाओं वाले बैटल ऑब्स्टेकल असॉल्ट कोर्स (BoAC) को लागू किया गया है, जिनका कठिनाई स्तर और समय मानक NSG के समान हैं। शारीरिक फिटनेस बढ़ाने के लिए, बल ने सभी बुनियादी पाठ्यक्रमों में 21 किलोमीटर की हाफ मैराथन शुरू की है। इसके अलावा, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में अब विशेष बलों के आतंकवाद-रोधी विशेषज्ञों द्वारा आयोजित किए जाने वाले ट्रेनिंग मॉड्यूल शामिल होंगे, जो CISF के बल सदस्यों को फील्ड ऑपरेशन और युद्ध कौशल में व्यावहारिक कौशल प्रदान करेंगे।
ये उपाय प्रत्येक CISF रिकूट में दृढ़ता, सामरिक कौशल और आत्मविश्वास पैदा करेंगे, जिससे वे उच्च-तनाव वाले सुरक्षा परिदृश्यों को प्रभावी ढंग से संभालने के लिए तैयार होंगे।
प्रौद्योगिकी संचालित बल
CISF द्वारा अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल में लागू किए गए विभिन्न सुरक्षा समाधानों के आधार पर, अपने प्रशिक्षण मॉड्यूल में स्क्रीनिंग, निगरानी और पता लगाने के लिए उपयोग की जाने वाली 20 अत्याधुनिक तकनीकों को एक एकीकृत प्रशिक्षण मॉड्यूल में संयोजित कर रिकूट को ड्रोन-रोधी प्रणालियों, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों और एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्रों का सीधा अनुभव प्रदान करेगा।
पहली बार, प्रशिक्षुओं को अपने अकादमी प्रशिक्षण के पहले दिन से ही इन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। सभी प्रशिक्षण केंद्रों में डिजिटल एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र स्थापित किए जाएँगे। ये केंद्र उपर्युक्त मॉड्यूल को एक साथ लाएँगे और प्रशिक्षुओं को इन उन्नत तकनीकों के संचालन का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करेंगे।
इस व्यापक अनुभव से सीआईएसएफ कार्मिक तकनीकी रूप से कुशल, परिचालन रूप से दक्ष और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार होंगे।
बल को ‘भविष्य के लिए तैयार’ बनाना सभी सीआईएसएफ कर्मियों को आग, आपदा और चिकित्सा संबंधी आकस्मिकताओं में प्रथम प्रतिक्रियाकतों के रूप में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित किया आएगा। वे प्रतिष्ठित संस्थानों से आग, आपदा प्रबंधन और प्रथम-चिकित्सा प्रतिक्रियाकर्ता पर प्रमाणन पाठ्यक्रम पूरा करेंगे। गौरतलब है कि सभी पात्र रिकूट अपने बुनियादी प्रशिक्षण के दौरान ही हवाईअड्डा स्क्रीनिंग ड्यूटी के लिए अर्हता प्राप्त कर लेंगे, जिससे हवाईअड्डों पर उनकी तत्काल तैनाती संभव होगी-जो विमानन सुरक्षा तैयारियों में एक बड़ा सुधार है।
बल 2,000 सूचीबद्ध प्रशिक्षकों का एक समूह बनाएगा, जिसमें 10% प्रशिक्षण सीटें महिला कर्मियों के लिए आरक्षित होंगी। प्रशिक्षकों के चयन के लिए उच्च मानक निर्धारित किए गए हैं। एक केंद्रीय प्रशिक्षक प्रबंधन प्रणाली (सीआईएमएस) शुरू की जा रही है जिसके माध्यम से इच्छुक और योग्य कर्मी प्रशिक्षक बनने के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह उनकी पोस्टिंग को सुव्यवस्थित करने कौशल पर नज़र रखने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा। एक मजबूत फीडबैक तंत्र सभी प्रशिक्षण केंद्रों में जवाबदेही और प्रदर्शन मानकों को सुनिश्चित करेगा।
क्षमता निर्माणः लगातार बढ़ते बल की जनशक्ति की मांग को पूरा करने के लिए, सीआईएसएफ अपनी प्रशिक्षण क्षमता का विस्तार कर रहा है। गृह मंत्रालय (MHA) की मंजूरी से. सभी भर्ती प्रशिक्षण केंद्रों (RTC) की प्रवेश क्षमता 50% बढ़ाकर 1,500 कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, तीन नए आरटीसी की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जिन्हें प्राथमिकता के आधार पर बनाया जाएगा। इन उपायों से सीआईएसएफ हर साल लगभग 15,000 रिकूटों को प्रशिक्षित कर सकेगा।
उन्नयनः साथ ही, सीआईएसएफ का लक्ष्य क्षमता निर्माण आयोग (CBC) के तहत निसा हैदराबाद के लिए 5-स्टार मान्यता और सभी आरटीसी के लिए 4-स्टार रेटिंग प्राप्त करना है। ऐसी मान्यता न केवल सीआईएसएफ के प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता को मान्य करेगी, बल्कि इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के बराबर भी लाएगी।
निम्रलिखित विशिष्ट उत्कृष्टता केंद्र भी स्थापित किए जा रहे हैं
> प्रथम रिजर्व बटालियन, नूह में खेल उत्कृष्टता केंद्र।
> समर्पित एएसजी प्रशिक्षण के लिए नागरिक उड्डूयन सुरक्षा अकादमी (CASA)। >
तृतीय रिजर्व बटालियन, भिलाई में अग्निशमन सेवा प्रशिक्षण केंद्र (FSTC)।
> बुनियादी ढाँचे और तकनीकी उन्नयन के लिए आधुनिकीकरण योजना- के अंतर्गत
₹450 करोड़ का विशाल आवंटन ।
प्रमुख विश्वविद्यालयों-उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, मद्रास विश्वविद्यालय इग्नू और जेएनयू के साथ साझेदारी से सेवारत सीआईएसएफ कार्मिक निरंतर कौशल उन्नयन के लिए विशेष रूप से तैयार प्रमाणन कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। जल्द ही एक ऑनलाइन आवेदन पोर्टल शुरू किया जाएगा जहाँ कार्मिक विशेष पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन कर सकेंगे, जिससे पारदर्शिता और सभी के लिए पहुँच सुनिश्चित होगी।
महानिदेशक राजविंदर सिंह भट्टी, आईपीएस, ने कहा
“ये सुधार सीआईएसएफ को युद्ध के लिए सक्षम, संचालन में तकनीक दक्ष और भविष्य के लिए बहु-कुशल बल बनाएंगे। साथ ही, हमारे प्रशिक्षण संस्थान विश्व स्तरीय मानकों तक पहुँचेंगे। ये न केवल उत्कृष्ट सीआईएसएफ कार्मिक तैयार करेंगे, बल्कि भारत के राष्ट्रीय क्षमता निर्माण परिदृश्य में उत्कृष्टता के प्रतीक के रूप में भी उभरेंगे।”
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