बागपत
“गांव के विकास की मिसाल हैं अरुणा तोमर”

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। ग्राम जीवाणा की प्रधान अरुणा तोमर इन दिनों गांव में विकास के सबसे तेज़ और ठोस काम करने को लेकर चर्चाओं में हैं। गांव के लोग खुलकर कह रहे हैं— “इतना काम तो सालों में नहीं हुआ, जितना अरुणा दीदी ने एक ही कार्यकाल में कर दिया!”
उनसे विकास की इस यात्रा पर खास बातचीत—
प्रश्न 1 – अरुणा जी, जीवाणा के लोग आपके कामों की बहुत तारीफ कर रहे हैं। इतना बड़ा विकास अभियान कैसे संभाला?
अरुणा तोमर:
बहुत–बहुत धन्यवाद। सच कहूँ तो ये सब अकेले मेरा काम नहीं है। ये पूरे गांव का प्रेम, लोगों का भरोसा और पंचायत टीम की मेहनत का नतीजा है। मैं सिर्फ इतना चाहती थी कि जीवाणा किसी भी गांव से पीछे न रहे। बस उसी सपने ने मुझे दौड़–धूप में लगा दिया।
प्रश्न 2 – गांव में स्टेडियम और बास्केटबॉल ग्राउंड बनाने का विचार कैसे आया?
अरुणा तोमर:
हमारे गांव के बच्चे खेलों में बहुत आगे बढ़ना चाहते हैं, पर सुविधाओं की कमी थी। इसलिए मैंने सबसे पहले स्टेडियम और बास्केटबॉल कोर्ट बनवाया ताकि बच्चे बड़े सपने देख सकें और उन्हें पूरा भी कर सकें।
प्रश्न 3 – गांव में 1 किलोमीटर इंटरलॉक व पूरी गांव में लाइटिंग… बहुत बड़ा काम! यह कैसे संभव हुआ?
अरुणा तोमर:
इंटरलॉक सड़कें और पूरी गांव की स्ट्रीट लाइटिंग मेरी प्राथमिकता थीं।
आज जीवाणा ऐसा गांव बन चुका है जहाँ रात में भी शहर जैसा उजाला रहता है। महिलाएँ, बुजुर्ग और बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं—यह मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है।
प्रश्न 4 – आपने लाइब्रेरी को AC युक्त बनवाया और अध्ययन का माहौल बदला। इस पर कुछ कहना चाहेंगी?
अरुणा तोमर:
शिक्षा से ही गांव बदलता है। इसलिए मैंने AC लाइब्रेरी, नई किताबें, कंप्यूटर सुविधा सब उपलब्ध कराया। मेरा सपना है कि जीवाणा के बच्चे किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में पीछे न रहें।
पढ़ने वालों के लिए एक शांत, आधुनिक कल्चर जरूरी है—और हम वही बना रहे हैं।
प्रश्न 5 – 10 CC सड़कों का निर्माण और हरिजन चौपाल का सौंदर्यीकरण—इन कार्यों के पीछे क्या सोच थी?
अरुणा तोमर:
गांव की सुंदरता और सुविधा दोनों साथ चलें, यही सोचा था।
• 10 CC सड़कें बनने से आवाजाही आसान हुई।
• हरिजन चौपाल का सौंदर्यीकरण इसलिए जरूरी था ताकि गांव के हर नागरिक को सम्मान महसूस हो—हम सब एक हैं।
प्रश्न 6 – खेड़ा के देवता स्थान का सौंदर्यीकरण और बच्चों के लिए ओपन जिम… ये भी बड़े आकर्षक कार्य हैं।
अरुणा तोमर:
खेड़ा देवता स्थान हमारी आस्था का केंद्र है। उसे सुंदर, साफ-सुथरा और भव्य रूप देना मेरी जिम्मेदारी थी।
ओपन जिम गांव के युवाओं और बच्चों के लिए बनाया—स्वास्थ्य और फिटनेस जरूरी है। अब बच्चे मोबाइल से निकलकर फिटनेस में रुचि ले रहे हैं, यह देखकर बहुत खुशी होती है।
प्रश्न 7 – इतने कामों के बाद आगे का लक्ष्य क्या है?
अरुणा तोमर:
अभी तो बहुत काम बाकी हैं।
• गांव में सीसीटीवी लगवाना
• युवाओं के लिए स्किल सेंटर
• महिलाओं के लिए सिलाई–कढ़ाई प्रशिक्षण
ये मेरी अगली प्राथमिकताएँ हैं।
प्रश्न 8 – गांव के लोग आपके कार्यों से बेहद उत्साहित हैं। उन्हें क्या संदेश देना चाहेंगी?
अरुणा तोमर:
मैं सिर्फ यही कहना चाहूँगी कि—
“यह गांव है तो हम हैं!”
मैं अपने गांव को उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित गांवों में देखना चाहती हूँ, और यह काम तभी पूरा होगा जब हर नागरिक साथ देगा।
आप भरोसा रखें, जीवाणा की विकास यात्रा अब रुकेगी नही।
अरुणा तोमर ने अपने कार्यों से यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची, तो एक ग्राम प्रधान भी असंभव को संभव कर सकती है।
गांव जीवाणा आज विकास की एक चमकती मिसाल बन चुका है।



